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- वास्तविक घरेलू हिंसा अथवा सोशल मीडिया के प्रभाव से बिगड़ रहा पारिवारिक माहौल: वन स्टॉप सेंटर ने सुलझाए पारिवारिक उलझन&url=https://policewala.org.in/?p=45713" rel="nofollow">Tweet
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- वास्तविक घरेलू हिंसा अथवा सोशल मीडिया के प्रभाव से बिगड़ रहा पारिवारिक माहौल: वन स्टॉप सेंटर ने सुलझाए पारिवारिक उलझन https://policewala.org.in/?p=45713" target="_blank" rel="nofollow">
इंदौर मध्य प्रदेश
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग जिला इंदौर, रजनीश सिन्हा के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में वन स्टॉप सेंटर इंदौर हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए सदैव तत्परता से काम करता है। इसी क्रम में एक शाम अचानक वन स्टॉप सेंटर , इंदौर की प्रशासक डॉ वंचना सिंह परिहार के पास एक स्वयंसेवी संस्था का फोन कॉल आता है कि झांसी से एक महिला अपनी पुत्री के साथ इंदौर आ रही है, उनके परिवार में कुछ समस्या है और मां बेटी को इसके पिता से जान का खतरा है,इंदौर में रहने की कोई व्यवस्था नहीं है,कृपया इस प्रकरण को देख लीजिए। डॉक्टर वंचना सिंह परिहार द्वारा स्वयं सेवी संस्था के कॉलर को कहा गया कि वह पीड़ित पक्ष को उनका मोबाइल नंबर, डिटेल और फोटोग्राफ्स उपलब्ध करा दे तथा वन स्टॉप सेंटर की लोकेशन की जानकारी दी गई ताकि वह महिला अपनी बेटी के साथ आसानी से वन स्टॉप सेंटर पहुंच सके।
दूसरे दिन सुबह महिला, आयु लगभग 45 वर्ष अपनी बेटी श्रुति (परिवर्तित नाम) आयु लगभग 20 वर्ष के साथ वन स्टॉप सेंटर इंदौर में उपस्थित हुई।
सर्वप्रथम महिला और उनकी बेटी को वन स्टॉप सेंटर में आश्रय प्रदान किया गया तथा कुछ समय पश्चात उनके संयत होने पर प्रशासक द्वारा उनकी समस्या सुनी गई और प्रकरण काउंसलिंग हेतु समाजसेवी मनोवैज्ञानिक श्रीमती नीलम सिन्हा को सौंपा गया।
परामर्श में यह तथ्य सामने आया कि मां और बेटी पारिवारिक विवाद के बाद अपने मायके झांसी में रह रहे थे लेकिन मायके वालों ने उन्हें अपने घर इंदौर भेज दिया क्योंकि वह लंबे समय तक उन्हें नहीं रखना चाहते थे । परामर्श में ज्ञात हुआ कि बेटी श्रुति और उसकी मां अपने घर (पिता के पास) नहीं जाना चाहते थे। बेटी का कहना था कि पिता का व्यवहार हम लोगों के साथ अच्छा नहीं है, वह बहुत गुस्सा करते हैं और कभी-कभी नौबत मार पिटाई तक की, हो जाती है। और बेटी श्रुति जिद में आ गई कि अब उसे वन स्टॉप सेंटर में भी आश्रय नहीं लेना उसे निर्मुक्त करके अपने हिसाब से जीने की आजादी दी जाए। ऐसे में प्रशासक द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा से मार्गदर्शन लिया गया ,जिसमें डीपीओ ने मार्गदर्शन दिया कि बच्ची को निरंतर परामर्श में लेते हुए समझाया जाना उचित है अभी उसको अकेले निर्मुक्त नहीं किया जाना चाहिए। अनुमति पश्चात निरंतर
मां बेटी को वन स्टॉप सेंटर में ही आश्रय निरंतर रखते हुए उनके पिताजी को परामर्श हेतु वन स्टॉप सेंटर बुलाया गया। पिता से परामर्श के दौरान यह ज्ञात हुआ कि बेटी मोबाइल पर किसी से बात करती है तथा उसकी मां उसे मना नहीं करती है बल्कि उसका समर्थन करती रहती है। इस बात से परिवार में अशांति रहती है। परामर्श में यह तथ्य भी सामने आया कि मां को स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं तथा उन्हें बहुत कम दिखाई देता है, जिसके कारण वह घर की साफ सफाई एवं अन्य कार्य सहजता पूर्वक नहीं कर पाती हैं, जिसके कारण उनके पति उनसे चिल्ला चपट करते हैं तथा कभी-कभी मारपीट भी हो जाती है।
पिता को समझाइश दी गई कि वह इस प्रकार की गतिविधि बिल्कुल ना करें और अपनी पत्नी का इलाज कराएं, जब उन्हें ठीक से दिखता ही नहीं है ,तो वह काम कैसे कर सकती हैं?
क्रमशः पृथक- पृथक एवं संयुक्त परामर्श के बाद दोनों पक्ष सहमत हुए कि अब पिता अपनी पत्नी की स्वास्थ्य परिचर्या पर ध्यान देंगे ताकि वह घर का काम सुगमता पूर्वक कर सके। बेटी श्रुति को परामर्श दिया गया कि वह अपना ध्यान पढ़ाई में लगाए और पिता की बात को मानते हुए अनावश्यक रूप से मोबाइल पर बात ना किया करें। माता-पिता हमेशा अपने बच्चों का भला चाहते हैं इसलिए यदि पिता कभी कुछ कहते भी हैं तो वह उसका अनुसरण किया करें क्योंकि वह उनका भला ही चाहते हैं।
श्रुति को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और वह अपने पिता के साथ जाने को तैयार हो गई । इस प्रकार वन स्टॉप सेंटर इंदौर पर प्रशासक एवं टीम की तत्परता एवं बेहतर काउंसलिंग के कारण परिवार टूटने से बच गया और पूरा परिवार खुशी-खुशी वन स्टॉप सेंटर के स्टाफ को धन्यवाद देते हुए अपने घर रवाना हो गया। रिपोर्ट अनिल भंडारी
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