अधिकांश यह वाक्यांश उन कहानियों में उपयोग किया जाता है जहां एक व्यक्ति गांव से उठकर शहर जाता है, शिक्षा प्राप्त करता है और फिर पुलिस बल में शामिल होकर थानेदार बनता है| यह कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओ के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है जो अक्सर सीमित संसाधनों और अवसरों के साथ संघर्ष करते हैं| यह वाक्यांश सिर्फ एक वाक्य नहीं है बल्कि यह एक प्रेरणादायक कहानी भी है जो सफलता, संघर्ष और कड़ी मेहनत के बारे में बताती है| एक ऐसी कहानी जहां कोई लड़का जो गांव से है, पुलिस में थानेदार के पद तक पहुंचता है, जो दिखाती है कि कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी सफलता प्राप्त कर सकता है| यहाँ मुझे गांव वालों को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यही कहानी हमारे लिए एक हकीकत बन चुकी है| बताया जाता है कि रामेश्वर जी गोप्लान के सुपुत्र अभिषेक गोप्लान (27 वर्ष) थानेदार बनकर पहली बार ग्राम हिंगोनिया में आ रहा हैं| यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि श्री अभिषेक गोप्लान ने थानेदार बनकर अपने परिवार का ही नहीं बल्कि अपने गांव हिंगोनिया का नाम भी रोशन किया है|
जानकारी दी जाती है कि अभिषेक गोप्लान का केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सीधा पुलिस सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हुआ है| दिनांक 5 अगस्त 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य में पोस्टिंग होने के बाद एक वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त करके अभिषेक गोप्लान, कल सुबह यानी कि 7 अगस्त 2025 को अपने गांव ग्राम हिंगोनिया में आयेगा| केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल भारत का सबसे बड़ा सशस्त्र पुलिस बल है| इस बल को देश में प्राथमिक आंतरिक सुरक्षा बल के रूप में अभिहित किया गया है| सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री अभिषेक गोप्लान की छत्तीसगढ़ राज्य में पोस्टिंग हुई है जहां माओवादी तानाशाही स्थापित है, ऐसे में अभिषेक गोप्लान की वहां राज्य की उच्च स्तरीय सुरक्षा में तैनाती होगी| यह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है ऐसे में हमें भी चाहिए कि ऐसे होनहार युवा शख्सियत को प्रोत्साहित करने के लिए हम आगे आए| अभिषेक गोप्लान के ग्राम हिंगोनिया पहुंचने पर ग्राम वासियों द्वारा डीजे के साथ माला में सफा पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया अभिषेक गोप्लान के थानेदार बनने पर गांव में खुशी की लहर
रिपोट:शिवशंकर वैष्णव
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