रायपुर, छत्तीसगढ़
संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए माताओं ने आज हलषष्ठी व्रत श्रद्धापूर्वक मनाया। इस दिन माताएं बिना हल से जुती हुई जमीन में पैदा हुए अनाज और सब्जियों का सेवन करती हैं। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्हें हलधर के नाम से भी जाना जाता है।
खैरागढ़ राजघराने की राजमाता पद्मदेवी ने इस अवसर पर कहा, “हलषष्ठी व्रत हमारी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह व्रत माताओं के अपनी संतान के प्रति असीम प्रेम और त्याग को दर्शाता है। हम सभी को अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।”
सामाजिक कार्यकर्ता मंजू राठी ने इस व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज में सद्भाव और प्रेम का प्रतीक है। हलषष्ठी व्रत हमें यह सिखाता है कि माताओं का हमारी जिंदगी में क्या महत्व है।”
इस दिन महिलाओं ने अपनी संतान की सलामती के लिए पूजा-अर्चना की और व्रत के नियमों का पालन किया। शाम को पूजा के बाद माताओं ने पसहर चावल (बिना हल की जुताई वाली जमीन में उगाया गया चावल) और भैंस के दूध से बने व्यंजनों का सेवन कर अपना व्रत खोला।
रिपोर्ट :मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़
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