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कांग्रेस ने टोल प्लाजा तत्काल हटाने की उठाई मांग

रायपुर

अवैध वसूली कर सरकार और जनता को लगाया जा रहा है चूना…
भ्रष्टाचार को मोदी सरकार की मौन स्वीकृति… छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक जा रहा है मोटा माल

दो टोल के बीच दूरी को लेकर दिया गडकरी का फरमान, फरमान कचरे के ढेर में…

रायपुर (छत्तीसगढ़) : लंबे समय से रायपुर और दुर्ग के बीच संचालित कुम्हारी टोल नाके की अनियमिताएं एवं अवैध वसूली के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोला हुआ है इस संबंध में चरणबद्ध आंदोलन कर अवैध वसूली को रोकने की मांग समय-समय पर की गई है, लेकिन अब तक इस मामले में ना ही राज्य सरकार ने कोई सार्थक कदम उठाया है ना ही केंद्र इस अवैध वसूली को लेकर गंभीर है, पूरे प्रकरण में आज कांग्रेस नेता पूर्व विधायक विकास उपाध्याय एवं जिला अध्यक्ष गिरीश दुबे के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंकज शर्मा एवं कन्हैया अग्रवाल ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टोल की अवैध वसूली के तथ्य मीडिया कर्मियों के सामने रखें।

   

रायपुर से दुर्ग के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-53 (पूर्व NH-6) पर संचालित कुम्हारी टोल प्लाजा को लेकर जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। केवल 54 किलोमीटर की दूरी में तीन टोल प्लाजा – मंदिर हसौद (किमी 258), कुम्हारी (किमी 281), और दुर्ग (किमी 312) – संचालित हो रहे हैं, जो भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें दो टोल प्लाजा के बीच कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी अनिवार्य की गई है।

सबसे विवादास्पद स्थिति कुम्हारी टोल प्लाजा को लेकर है, जिसकी वैधानिक वसूली अवधि समाप्त हो चुकी है, फिर भी यह 20 से 25 वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रहा है। स्थानीय निवासियों, खासकर रायपुर के टाटीबंध और कुम्हारी नगर निगम क्षेत्र के लोगों को प्रतिदिन भीषण ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कई बार 1 से 2 घंटे तक यात्री जाम में फंसे रहते हैं।

जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को कई बार केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के समक्ष उठाया गया है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस टोल प्लाजा को अविलंब बंद करने की मांग पहले ही की थी पर सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है और टोल वसूली जारी है वैसे तो नियमानुसार जब टोल वसूली की निर्धारित लागत वर्षों पहले ही वसूल की जा चुकी है, तो इस टोल प्लाजा का संचालन पूरी तरह से अवैध और जनविरोधी है।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन चलाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

कांग्रेस का सीधा आरोप है कि यह टोल नाका न केवल अवैध वसूली का केंद्र बन गया है, बल्कि जानलेवा जाम और दुर्घटनाओं की वजह से यह स्थानीय नागरिकों के लिए संकट का कारण बन चुका है।

समय सीमा समाप्त होने के बाद वसूलीः

1. कई बार टोल प्लाजा की वैधानिक अवधि (Concession Agreement Period) समाप्त हो जाने के बावजूद, पुराने ठेकेदार या एजेंसियाँ टोल वसूली जारी रखती हैं। यह कॉन्ट्रैक्ट उल्लंघन है और इसे “अवैध वसूली“ माना जाता है।

2. सार्वजनिक निधियों (Public Funded Projects) में मनमानीः
कुछ टोल प्लाजा सरकारी निधियों से निर्मित होते हैं, जहाँ टोल वसूली एक तय अवधि तक ही की जा सकती है। लेकिन कई बार इनकी वसूली अनिश्चित काल तक जारी रहती है, जो पूर्णतया नियमविरुद्ध है।

3. ट्रैफिक घनत्व का दुरुपयोगः
कई टोल प्लाजा अधिक ट्रैफिक घनत्व वाले क्षेत्रों में स्थित होते हैं, जहाँ लोगों को वैकल्पिक मार्ग नहीं मिलते। इसका लाभ उठाकर अवैध वसूली की जाती है और स्थानीय जनता मजबूरी में भुगतान करती है।

4. नियमों का उल्लंघन – दूरी संबंधी गाइडलाइनः
NHAI की गाइडलाइन के अनुसार, दो टोल प्लाज़ा के बीच कम से कम 60 किमी की दूरी होनी चाहिए। लेकिन जब यह नियम तोड़ा जाता है (जैसे मंदिरहसौद-कुम्हारी-दुर्ग केस में), तो यह अवैध वसूली की श्रेणी में आता है।

5. मनमाने दर से शुल्क वसूलनाः
कुछ टोल प्लाजा पर पुराने रेट चार्ज किए जाते हैं या रेट चार्ट सार्वजनिक नहीं होता, जिससे जनता को भ्रमित कर अधिक शुल्क लिया जाता है।

6. स्थानीय वाहनों से वसूलीः
स्थानीय निवासियों को NHAI के नियमों के अनुसार छूट या रियायत मिलनी चाहिए, लेकिन कई टोल प्लाजा नियमों की अनदेखी कर इनसे भी नियमित वसूली करते हैं।

वर्तमान में रायपुर से दुर्ग के बीच टोल नाके (NH-53 पर)ः

रायपुर से दुर्ग के बीच लगभग 54 किलोमीटर की दूरी है, जिस पर तीन टोल प्लाजा संचालित हैंः

1. मंदिर हसौद टोल प्लाजा – किमी 258.650 (NH-53)
नया स्थापित टोल (BOT आधारित)

2. कुम्हारी टोल प्लाजा दृ किमी 281.400 (NH-53)
सार्वजनिक निधि से निर्मित (Public Funded)
इसकी वैधता समाप्त हो चुकी है, पर वसूली जारी है

3. दुर्ग टोल प्लाजा – किमी 312.780 (NH-6 /NH-53)
BOT आधारित टोल

टोल प्लाजा के बीच की दूरी :-

मंदिर हसौद से कुम्हारी – लगभग 23 किमी

कुम्हारी से दुर्ग – लगभग 31 किमी

कुल दूरी (तीनों के बीच) – 54 किमी में 3 टोल प्लाजा

NHAI / MoRTH के अनुसार नियमः

भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के दिशा-निर्देशों के अनुसारः

दो टोल प्लाजा के बीच की न्यूनतम दूरीः
60 किलोमीटर होनी चाहिए (सामान्यतः National Highways पर) इस नियम का पालन ना कर के वसूली जारी रखी गई हैटोल प्लाजा संचालन के लिए NHAI या MoRTH (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) से अनुबंध जरूरी होता है।

जबकि स्पष्ट नियम है की-
यदि टोल संचालन का अनुबंध समाप्त हो गया हो या नियमों का उल्लंघन हो, तो राज्य सरकार अथवा लोक प्रतिनिधि मंत्रालय से टोल को बंद कराने की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर से मुंह फेरा हुआ है और देखते जानते समझते हुए भी राज्य सरकार की आंखों में पट्टी बंधी हुई है।

इसलिए हम अब केंद्र की मोदी सरकार और NHAI से मांग करते हैं कि-

1. कुम्हारी टोल प्लाजा को अविलंब बंद किया जाए।
2. अवैध वसूली की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
3. स्थानीय नागरिकों को यातायात जाम और दुर्घटनाओं से राहत दिलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
4. स्थानीय नागरिकों से नियम विरुद्ध फास्ट्रेक कैमरा लगा कर, अवैध वसूली की जा रही है इस प्रकरण में कंपनी से जनता से वसूली गई रकम वसूली जाए।

कांग्रेस पार्टी द्वारा पूर्व में भी विरोध के कारण रायपुर राजधानी स्थित सुन्दर नगर में टोल प्लाजा का निर्माण भारतीय जनता पार्टी के शासन में किया जा रहा था जिसे शासन को बंद करना पड़ा। पूर्व में हमारे द्वारा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी को पत्र प्रेषित कर कुम्हारी टोल प्लाजा को बंद करने की मांग हेतु एवं छत्तीसगढ़ प्रतिनिधि मंडल को वार्ता हेतु समय की मांग की गई थी, लेकिन आज दिनांक तक उनका कोई जवाब नहीं आया है। वर्तमान में कुछ दिनों पूर्व हमने भारतीय जनता पार्टी के 10 लोकसभा सांसदों को पत्र प्रेषित किया गया कि आप लोग भी कुम्हारी टोल प्लाजा को बंद कराने हेतु सहयोग करें और कांग्रेस द्वारा लगातार अवैध टोल प्लाजा के खिलाफ आंदोलन किये जा रहे है

रिपोर्ट-मयंक श्रीवास्तव

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