भारतीय उद्योग जगत के अद्वितीय नेता रतन टाटा का निधन भारतीय व्यापारिक इतिहास में एक गहरा शून्य छोड़ गया है। 86 वर्ष की आयु में, 2024 में उनका निधन हुआ, और उनके साथ भारतीय उद्यमिता के एक युग का समापन हुआ। रतन टाटा केवल एक सफल उद्योगपति नहीं थे, बल्कि वे नैतिकता, उदारता और समाज के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता के लिए भी जाने जाते थे। उनके जीवन और योगदान ने न केवल भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध किया, बल्कि सामाजिक रूप से भी उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। रतन टाटा, भारतीय उद्योग जगत के वह महानायक हैं, जिन्होंने न केवल टाटा समूह को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि व्यापार में नैतिकता और समाज के प्रति दायित्वों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी नेतृत्व क्षमता और दृष्टिकोण ने उन्हें एक अद्वितीय व्यापारिक व्यक्तित्व बना दिया है। लेकिन उनकी कहानी केवल व्यापारिक सफलता की नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की है, जिसने अपने जीवन में प्रेम, सदाशयता और सेवा को उच्चतम स्थान दिया।
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित और व्यवसायिक परिवार से आते थे, जो जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित टाटा समूह का हिस्सा था। रतन टाटा का बचपन संघर्षपूर्ण था क्योंकि उनके माता-पिता का तलाक हो गया था, और उन्हें अपनी दादी नवाजबाई टाटा ने पाला। बचपन में मिली यह भावनात्मक चुनौती उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जिसने उनके व्यक्तित्व को सहनशील और संवेदनशील बनाया।
उनकी शिक्षा अमेरिका के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से हुई। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम किया। उनके पास अमेरिका में काम करने के अवसर थे, लेकिन अपनी दादी की प्रेरणा पर वे भारत लौटे और टाटा समूह में काम शुरू किया।
रतन टाटा ने 1961 में टाटा स्टील के शॉप फ्लोर से अपने करियर की शुरुआत की। यह अनुभव उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि उन्होंने श्रमिकों के साथ काम करके जमीनी हकीकत को नजदीक से देखा। 1991 में, जब जे.आर.डी. टाटा ने टाटा समूह की बागडोर रतन टाटा को सौंपी, तो यह समूह मुख्यतः भारतीय बाजार पर केंद्रित था। लेकिन रतन टाटा ने समूह को वैश्विक स्तर पर ले जाने का सपना देखा। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई वैश्विक अधिग्रहण किए, जिनमें टाटा स्टील का कोरस (2007), टाटा मोटर्स का जगुआर-लैंड रोवर (2008) और टाटा टी का टेटली (2000) अधिग्रहण शामिल हैं। ये अधिग्रहण न केवल टाटा समूह को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक बने, बल्कि भारतीय उद्योग जगत के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बने। रतन टाटा की दूरदर्शिता और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने की नीति ने टाटा समूह को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
उनके कार्यकाल में ही टाटा मोटर्स ने “टाटा नैनो” जैसी सस्ती कार लॉन्च की, जिसे दुनिया की सबसे किफायती कार के रूप में देखा गया। नैनो का उद्देश्य भारतीय मध्यम वर्ग के लोगों के सपने को साकार करना था। इस परियोजना में उनकी व्यक्तिगत दिलचस्पी ने दिखाया कि वे केवल व्यापारिक लाभ पर ध्यान नहीं देते थे, बल्कि समाज के हर तबके की आवश्यकताओं को समझते थे।
रतन टाटा का निजी जीवन सादगी और विनम्रता का एक उदाहरण है। हालांकि उन्होंने चार बार विवाह करने का विचार किया, लेकिन हर बार किसी न किसी कारणवश विवाह नहीं हो सका। उनका सबसे गहरा प्रेम एक अमेरिकी युवती से हुआ था, जब वे अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे। वे उसे भारत लाना चाहते थे, लेकिन युवती के परिवार ने अनुमति नहीं दी, और इस प्रकार उनका यह संबंध समाप्त हो गया। इसके बाद, उन्होंने कभी विवाह नहीं किया और जीवनभर अविवाहित रहे। उनका यह निर्णय उनके जीवन में भावनात्मक रूप से गहरे प्रभाव छोड़ गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन को समाजसेवा और व्यवसायिक जिम्मेदारियों में लगा दिया। उनका व्यक्तिगत जीवन बहुत ही सरल था, और उनकी सादगी हमेशा उनके सार्वजनिक जीवन में भी दिखाई देती रही। वे बहुत ही मिलनसार और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे, जो अक्सर बड़े से बड़े सम्मेलनों में भी सरल कपड़ों में नजर आते थे।
रतन टाटा का प्रेम केवल इंसानों तक ही सीमित नहीं था। उन्हें जानवरों से बेहद लगाव था, विशेषकर कुत्तों से। उनके घर में कई कुत्ते रहते थे, और वे उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे। टाटा समूह की इमारतों में भी आवारा कुत्तों के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। यह उनकी सहानुभूति और संवेदनशीलता का एक और पहलू था, जो उनके मानवीय पक्ष को उजागर करता है।
रतन टाटा का जीवन सदैव परोपकार और समाजसेवा से प्रेरित रहा। वे केवल एक सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा समाज की भलाई के लिए समर्पित किया। टाटा समूह की “कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी” (CSR) नीतियों के तहत उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहल की एवं इन क्षेत्रों में टाटा समूह की पहलें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करती हैं। टाटा ट्रस्ट, जो भारत के सबसे बड़े परोपकारी संगठनों में से एक है, उनके नेतृत्व में समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत रहा।अपने ही कर्मचारी के लिए उसके नौकरी छोड़ने के बाद भी उसको सहयोग देना, यह कोई टाटा परिवार से सीखें जो उन्होंने मूर्ति परिवार का पूरा सहयोग कर एक ” इंफोसिस” जैसी कंपनी का निर्माण किया।
उन्होंने ने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज के कल्याण के लिए दान कर दिया। वे सादगी और नैतिकता में विश्वास रखते थे, और उनके जीवन का यह पहलू उन्हें अन्य उद्योगपतियों से अलग करता है। उन्होंने कई मौकों पर मानवीयता और उदारता का परिचय दिया, जिसमें टाटा अस्पतालों का निर्माण और शिक्षा संस्थानों के लिए आर्थिक सहयोग शामिल है।
रतन टाटा की उदारता केवल टाटा समूह तक सीमित नहीं थी। 26/11 के मुंबई हमलों के बाद, उन्होंने ताज होटल के कर्मचारियों और उनके परिवारों की सहायता के लिए व्यक्तिगत रूप से कदम उठाए। उनका यह कदम दिखाता है कि वे न केवल एक संवेदनशील व्यवसायी थे, बल्कि कठिन परिस्थितियों में दूसरों का सहारा बनने वाले एक महान व्यक्ति भी थे।
रतन टाटा के जीवन के कुछ पहलू बहुत कम लोग जानते हैं। वे एक प्रशिक्षित पायलट थे, और उन्हें विमान उड़ाने का बहुत शौक था। 2007 में उन्होंने F-16 फाइटर जेट उड़ाया था, जो उनके साहसी और रोमांचक व्यक्तित्व का प्रतीक है। इसके अलावा, उन्हें कारों का भी बहुत शौक था, और उनके पास कई प्रतिष्ठित कारें थीं।
रतन टाटा केवल एक व्यापारिक नेता नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने जीवन में सादगी, उदारता, और प्रेम को सर्वोच्च स्थान दिया। उनके नेतृत्व ने जहां टाटा समूह को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, वहीं उनके मानवीय कार्यों ने समाज के प्रति उनके गहरे समर्पण को भी उजागर किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि व्यापार में सफलता केवल मुनाफे से नहीं, बल्कि नैतिकता, सदाशयता और समाजसेवा से प्राप्त होती है।
उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो व्यापार में नैतिकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी को महत्व देता है। उनका जीवन सिद्ध करता है कि चाहे कितनी भी ऊंचाइयां क्यों न छू लें, अपने मूल्यों और आदर्शों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
रतन टाटा के निधन से भारतीय उद्योग जगत में एक युग का अंत हो गया। उनका जीवन केवल व्यापारिक सफलता की कहानी नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी थी जिसने अपने मूल्यों और नैतिकता से समाज को नई दिशा दी। उनका निधन न केवल व्यापारिक जगत के लिए, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए भी एक बड़ी क्षति है, जिन्होंने उनसे प्रेरणा ली।रतन टाटा ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि व्यापार में सफलता केवल मुनाफे से नहीं, बल्कि नैतिकता, सदाशयता और समाज के प्रति जिम्मेदारी से प्राप्त होती है। जिनका नाम ही रतन हो उसे भारत रत्न सरकार दे या ना दे, कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि कई बार पुरस्कार ही पुरस्कृत किये गए व्यक्ति से गौरवान्वित होता है, यह वैसी ही परिस्थिति है। उनके आदर्श, उनकी सादगी और उनकी उदारता उन्हें हमेशा के लिए भारतीय समाज की स्मृतियों में जीवित रखेगी और वे हमेशा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे ।
( राजीव खरे ब्यूरो चीफ़ छत्तीसगढ़ )
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