नीमच। बिसलवासकलां में बिजली ग्रिड पर काम करने गए 36 वर्षीय आउटसोर्स लाइनमैन प्रतापसिंह पिता भंवर सिंह राजपूत निवासी अबावली महल की करंट की चपेट में आने से मौत के बाद नीमच में बिजली कंपनी के खिलाफ बड़ा आक्रोश देखने को मिला। हादसे के बाद शुरू हुआ विरोध देखते ही देखते चक्का जाम और धरने में बदल गया और करीब 12 घंटे तक सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन चलता रहा।
मृतक प्रतापसिंह पिता भंवरसिंह राजपूत, निवासी अबावली महल, मंगलवार दोपहर ग्रिड पर काम कर रहे थे। परिजनों का आरोप है कि बिजली कंपनी के एरिया सुपरवाइजर दिलीप अग्रवाल के पास दोपहर 3 बजे तक बिजली बंद रखने का परमिट था, लेकिन आरोप है कि करीब 2.30 बजे ही लाइन चालू कर दी गई। इसी दौरान प्रतापसिंह करंट की चपेट में आ गए।
हादसे के बाद साथी कर्मचारी प्रतापसिंह को शाम करीब 4.06 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद गुस्साए परिजन और समाजजन शव लेकर सीआरपी-गोमाबाई रोड स्थित बिजली कंपनी कार्यालय पहुंच गए।
सड़क पर शव रख दिया गया और देखते ही देखते पूरा रास्ता जाम हो गया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बिजली कंपनी में बिल जमा कराने पहुंचे लोग भी कार्यालय परिसर में फंस गए। मौके पर एई महीप सोनी, तहसीलदार और बघाना थाना प्रभारी पुष्पासिंह चौहान पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे।
शेरपुर की एंट्री के बाद आंदोलन ने पकड़ा जोर
मामला शांत कराने की कोशिशों के बीच करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर करीब 1 बजे नीमच पहुंचे। शेरपुर सीधे धरना स्थल पर पहुंचे और मृतक के परिजनों व समाजजनों के साथ आंदोलन में शामिल हो गए।
शेरपुर ने बिजली कंपनी के अधिकारियों से पूरे मामले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कथित लापरवाही के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने और मृतक परिवार को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने की मांग उठाई। शेरपुर के पहुंचने के बाद आंदोलन और तेज हो गया।WhatsApp Image 2026 10 07 at 11.00.48 2
धरने पर मौजूद लोगों ने बिजली कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करणी सेना जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह बावल, प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह शक्तावत, बिट्टू बना सहित बड़ी संख्या में समाजजन आंदोलन में शामिल रहे।
4 लाख की सहायता पर भड़का आक्रोश
प्रदर्शनकारियों ने मृतक परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा या पत्नी अथवा छोटे बच्चे को नौकरी देने की मांग रखी। अधिकारियों की ओर से जब 4 लाख रुपए की सहायता की बात सामने आई तो प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया।
इसके बाद जीवन सिंह शेरपुर सहित आंदोलनकारियों ने मांग पूरी होने तक शव नहीं उठाने की बात कही। अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार समाधान का रास्ता निकला।
17 लाख मुआवजा, पेंशन और नौकरी के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन
करीब 12 घंटे तक चले चक्का जाम और प्रदर्शन के बाद बिजली कंपनी की ओर से 17 लाख रुपए मुआवजा, परिवार को पेंशन और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद परिजन और समाजजन आंदोलन समाप्त करने पर सहमत हुए।

जिला ब्यूरो ललित सिंह चुंडावत नीमच

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