शहडोल। संभागीय मुख्यालय से महज चंद किलोमीटर दूर जमुई स्थित टोल प्लाजा इस वक्त नियमों को ठेंगे पर रखकर जनता को लूटने और गुंडागर्दी करने का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। नेशनल हाईवे 43 (एनएच-43) पर स्थित इस टोल प्लाजा पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कायदे-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं और टोल प्रबंधन सत्ताधारी दल के एक ऐसे रसूखदार नेता की छत्रछाया में फल-फूल रहा है, जिसकी सरेराह हुई फजीहत की गूंज अभी थमी भी नहीं है।
ओवरलोड वाहनों को ग्रीन कॉरिडोर
टोल प्लाजा पर नियमों के मुताबिक अगर कोई ओवरलोड वाहन पहुंचता है, तो उसका अतिरिक्त माल वहीं खाली कराने और भारी जुर्माना ठोकने का प्रावधान है, लेकिन जमुई टोल प्लाजा पर नजारा बिल्कुल उलट है। यहां हर दिन दर्जनों ओवरलोड कालिख और गिट्टी लदे ट्रक सीना तानकर बिना किसी रोक-टोक के क्रॉस हो रहे हैं। ऐसा लगता है कि टोल प्रबंधन और ओवरलोड माफियाओं के बीच अघोषित डील हो चुकी है। वहीं हाईवे पर गाडिय़ां खराब होने (ब्रेकडाउन) पर उन्हें तत्काल हटाने का नियम है, ताकि कोई दुर्घटना न हो, लेकिन जमुई टोल पर क्रेन और अमला तब तक नहीं जागता जब तक कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
हादसों में दौड़ती है शासन की 108
एनएचआई के कड़े निर्देश हैं कि हर टोल प्लाजा पर आपातकालीन चिकित्सा के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से लैस एम्बुलेंस 24 घंटे मुस्तैद रहनी चाहिए। जमुई टोल पर एम्बुलेंस सफेद हाथी की तरह खड़ी तो रहती है, लेकिन उसका स्टाफ कभी नजर नहीं आता। मजे की बात देखिए, एनएच-43 पर आए दिन खूनी हादसे होते हैं, लोग तड़पते हैं, लेकिन टोल की एम्बुलेंस टस से मस नहीं होती। हर बार शासन की 108 एम्बुलेंस ही घायलों को अस्पताल पहुंचाती नजर आती है। तो फिर टोल टैक्स के नाम पर वसूला जाने वाला सर्विस चार्ज किसकी जेब में जा रहा है?
धुने गए नेता का वरदहस्त!
स्थानीय बेरोजगारों को दरकिनार कर टोल प्लाजा पर बाहरी राज्यों और जिलों के संदेहास्पद लोगों को तैनात किया गया है। चर्चा है कि इनमें से अधिकांश का कोई पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र प्रमाण पत्र) तक नहीं हुआ है। यही वजह है कि बात-बात पर ये बाहरी कारिंदे स्थानीय वाहन चालकों और ग्रामीणों से गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इन गुर्गों को सत्ताधारी दल के जिस कथित नेता का संरक्षण प्राप्त है, उसकी रसूख का अंदाजा इसी से लगा लीजिए कि बीते दिनों जिला मुख्यालय में एक ऑटो वाले ने सरेराह उसकी धुनाई कर दी थी। खुद पिट चुके नेताजी के दम पर टोल के ये गुंडे अब आम जनता पर रौब झाड़ रहे हैं।
20 किमी के दायरे में टैक्स वसूलना अवैध
जमुई टोल प्लाजा पर स्थानीय निवासियों को भी जबरन प्रताडि़त कर टैक्स वसूला जा रहा है, जो कि कानूनन अपराध है। एनएच-43 के आधिकारिक नियमों (टोल रूल्स 2008) के मुताबिक, टोल प्लाजा जहां पर स्थित होता है, उसके 20 किलोमीटर के दायरे (रेडियस) में रहने वाले स्थानीय निवासियों के गैर-व्यावसायिक (निजी) वाहनों पर कोई टोल टैक्स नहीं लगता है। स्थानीय लोगों के लिए नाममात्र के शुल्क (लगभग 300 से 330 रुपये प्रति माह) पर लोकल पास जारी करने का प्रावधान है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के आ-जा सकें। इसके अलावा, यदि टोल लेन में वाहनों की कतार 100 मीटर से लंबी हो जाए, तो वाहनों को बिना टोल दिए (येलो लाइन नियम) निकालने का प्रावधान है।
कब जागेगा प्रशासन
जमुई टोल प्लाजा पर चल रहा यह काला खेल जिला प्रशासन और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर बिना वेरिफिकेशन के बाहरी लोग यहां कैसे जमे हैं, ओवरलोडिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? स्थानीय जनता ने अब दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि गुंडागर्दी बंद नहीं हुई और 20 किलोमीटर के दायरे वाले नियम को कड़ाई से लागू कर स्थानीय लोगों को राहत नहीं दी गई, तो टोल प्लाजा पर बड़ा उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अजय पाल

