**कमिश्नर संबित मिश्रा के ‘भ्रष्टाचार विरोधी’ दावों की परीक्षा: छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति ने सौंपे सबूत, अब कार्रवाई का इंतजार**
राजधानी रायपुर के नगर पालिक निगम में इन दिनों प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार को लेकर एक बड़ा गतिरोध खड़ा हो गया है। यह पूरा मामला नगर निगम कमिश्नर संबित मिश्रा के एक सार्वजनिक बयान और उसके बाद छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति द्वारा की गई त्वरित घेराबंदी से जुड़ा है। अब शहर भर में यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या कमिश्नर अपने वादे पर अडिग रहते हुए भ्रष्ट अधिकारियों पर डंडा चलाएंगे, या फिर यह मामला भी हमेशा की तरह ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा।
कमिश्नर का वह बयान जिसने शुरू की कशमकश
पूरे मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो बीते **4 जून 2026 को ‘नवभारत समाचार’** अखबार में रायपुर नगर निगम कमिश्नर संबित मिश्रा का एक बड़ा बयान प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था। कमिश्नर ने साफ तौर पर कहा था:
> “यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के ठोस प्रमाण हैं, तो वे सीधे मुझे उपलब्ध कराएं। नगर निगम में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पुख्ता प्रमाण मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
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कमिश्नर के इसी बयान को प्रशासनिक चुनौती मानते हुए **छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति** ने इस पर तुरंत अमल शुरू कर दिया।
### सचिव अविनाश साहू ने सबूतों के साथ घेरा
कमिश्नर के बयान के ठीक एक दिन बाद, यानी **5 जून 2026 को**, छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति के सचिव **अविनाश साहू** ने पूरी तैयारी के साथ नगर निगम मुख्यालय में दस्तक दी। अविनाश साहू ने कमिश्नर के दिए गए बयान का हवाला देते हुए भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा।
बड़ी बात यह है कि यह शिकायती आवेदन महज एक कोरा कागज नहीं है। समिति के सचिव अविनाश साहू ने आवेदन के साथ वित्तीय अनियमितताओं, पदीय दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े कई **ठोस दस्तावेज, प्रमाण और साक्ष्य** भी संलग्न किए हैं। साहू का दावा है कि ये सबूत इतने अकाट्य हैं कि अगर इनकी निष्पक्ष जांच हुई, तो निगम के कई अधिकारियों का सस्पेंड होना तय है।
### कार्रवाई होगी या ठंडे बस्ते में जाएगा मामला?
अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि इस शिकायत का भविष्य क्या होगा?
* **क्या बयान पर अडिग रहेंगे कमिश्नर संबित मिश्रा?**
अगर कमिश्नर संबित मिश्रा अपनी प्रशासनिक छवि और ‘नवभारत’ में दिए बयान पर कायम रहते हैं, तो उन्हें इन मिले हुए सबूतों के आधार पर तुरंत एक उच्च स्तरीय आंतरिक या स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करनी होगी। यदि ऐसा होता है, तो रायपुर नगर निगम में सफाई अभियान की एक नई शुरुआत देखी जा सकती है।
### जागरूक नागरिकों की टिकी हैं निगाहें
देखना होगा कि क्या उनका बयान सिर्फ अखबार की सुर्खियों तक सीमित था, या फिर वे सचमुच रायपुर नगर निगम को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की प्रशासनिक इच्छाशक्ति रखते हैं।
रिपोर्ट: मयंक श्रीवास्तव
