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महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय एक स्ववित्तपोषित विश्वविद्यालय जो जबलपुर संभाग में है।

राजनैतिक संरक्षण एवं अकूत दौलत के दबाव में किसी भी अधिकारी कर्मचारी की हिम्मत नहीं पड़ रही है कि उसके प्रबंधन द्वारा की जा रही अनियमितता को रोका जा सके। सूत्रो की मानें तो यहा सब कुछ प्रभाव में चल रहा है। कहा‌ जाए तो प्रत्यक्ष रूप से यह भारतीय संविधान, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अधिनियम जो संसद में पारित होकर महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से पारित है उनके नियमों एवं मध्यप्रदेश सरकार पर एक तरह का प्रहार है।

सूत्रो की मानें तो कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर माननीय न्यायालय से भी दूषित न्यायप्रक्रिया कराते हुए अन्याय संगत आदेश पारित कराया गया है। जिस दिन जाँच हो गई उस दिन सारा सच सामने आ जायेगा कि किस तरह अपने प्रभाव और राजनैतिक संरक्षण से नियमों को किस तरह से दूषित किया जा रहा है । सूत्र बताते हैं कि इसका प्रत्यक्ष प्रमाण महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय करौंदी जिला कटनी की अवैध परीक्षा महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के विजयनगर लमती में अवैध रूप संचालित हो रही थी जिसमें सामूहिक नकल होने के कारण छात्र संगठन द्वारा पुलिस प्रशासन के साथ एवं अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग जबलपुर संभाग संतोष जाटव एवं स्थानीय तहसीलदार तथा पुलिस प्रशासन पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में प्रकरण शासन के संज्ञान में आया था तथा मंत्रालय उच्च शिक्षा विभाग के शाखा 3 प्रभारी डॉक्टर अनिल पाठक द्वारा उच्च स्तरीय जांच करने की बात भी कही गई थी जिस पर सूचना के अधिकार के तहत की गई कार्यवाही एवं जांच संबंधी एवं पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति संबंधी जानकारी शासन स्तर से चाही गई थी। इसके संबंध में सतपुड़ा भवन आयुक्त कार्यालय उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा स्पष्ट रूप से संबंधता संचालन संबंधी अनुमतियां उपलब्ध नहीं होने के पत्र जारी किए हैं जिससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि उक्त परीक्षाएं शासन की अनुमति के बिना पाठ्यक्रम संचालित करते हुए तथा प्रवेश एवं परीक्षाकेन्द्रों की अनुमति भी राज्य सरकार एवं शासन से नहीं ली गई । ऐसे में संबंधित छात्रों का भविष्य पूर्णतः खतरे में नजर आता है, तथा उपाधियों की वैद्धता पर भी संवैधानिक सवाल नजर आता है। वर्तमान में B.Ed कॉलेजों की फर्जीवाड़े से संबंधित संचालन के संबंध में एसटीएफ ने मात्र ग्वालियर संभाग के महाविद्यालयों पर ही कार्यवाही की है। परंतु इन दस्तावेजों एवं तथ्यों को देखते हुए प्रशासन को एवं मुख्यमंत्री जी को संपूर्ण मध्यप्रदेश, विशेष रूप से इस प्रकरण में की जाने वाली लीपापोती और गुमराह पूर्ण कार्य करना तथा छात्रहित एवं संविधान से खिलवाड़ करते हुए अवैध कृत्यों को करने वालों के ऊपर कठोरतापूर्वक कार्रवाई करते हुए निष्पक्ष जांच संस्थिततश करना शासन की जिम्मेदारी है।‌ जिससे हो रही अवैध कृत्यों को विशेष कर शिक्षा जैसे क्षेत्र में जो कि देश का मुख्य आधार स्तंभ है जिसके आधार पर ही देश का भविष्य और निर्माण तथा प्रगति निर्भर करती है उसको दूषित होने से रोका जा सकेगा और‌ दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही होना भी बहुत अनिवार्य है।

रिपोर्ट – पुलिसवाला ब्यूरो

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