डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
*“हर घर जल” के दावों की खुली पोल, 10 लाख से ज्यादा की राशि के बाद भी पानी को भटक रहे ग्रामीण*
पंचायत की लापरवाही से खम्हरिया मे गहराया जल संकट, महिलाएं-बच्चे रोज पार कर रहे पहाड़ और घाट
मेहंदवानी । एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में “हर घर जल” योजना के सफल क्रियान्वयन के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं डिंडोरी जिले के मेहंदवानी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सुखलोडी के वनग्राम खमरिया की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। पंचायत विभाग की लापरवाही और उदासीनता के चलते गांव के सैकड़ों ग्रामीण भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि ग्रामीणों को प्रतिदिन लगभग दो किलोमीटर दूर पहाड़ी और घाट पार कर पानी लाना पड़ रहा है। गांव के कुएं, बावड़ियां और अन्य जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद पंचायत और संबंधित विभाग द्वारा समय रहते कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। न नियमित टैंकर भेजे गए और न ही खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई।
सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है। सुबह से शाम तक लोग पानी की तलाश में भटकते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब जानकारी सामने आई कि पीएचई विभाग द्वारा वनग्राम खमरिया की पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए ग्राम पंचायत को करीब 10 लाख 66 हजार रुपए की राशि वर्षों पहले स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद गांव में आज तक स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं हो पाई। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी लोग पानी के लिए क्यों तरस रहे हैं।
जल संकट से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। सैकड़ों ग्रामीण जनपद पंचायत मेहंदवानी पहुंचे और पंचायत विभाग के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर करते हुए तत्काल पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर करोड़ों की सरकारी योजनाओं और “हर घर जल” जैसे दावों के बावजूद ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है? और पंचायत विभाग की इस बड़ी लापरवाही पर कार्रवाई कब होगी?

