​शहडोल- जिले में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) द्वारा घोषित ‘विश्व आदिवासी/मूलनिवासी दिवस’ (9 अगस्त) आदिवासी समाज द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस भव्य कार्यक्रम के आयोजन को लेकर समाज के वरिष्ठ जननेता एवं पूर्व सरपंच शीतल सिंह टेकाम तथा समाज के प्रतिनिधियों ने तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।

​आयोजन की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए पूर्व सरपंच एवं वरिष्ठ समाजसेवी शीतल सिंह टेकाम ने बताया कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “विश्व आदिवासी दिवस हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक मूल्यों और पूर्वजों के बलिदान को याद करने का दिन है। समाज को एकजुट होकर अपनी जड़ों से जुड़े रहना और भावी पीढ़ी को शिक्षित व सशक्त बनाना समय की माँग है।” शीतल सिंह टेकाम ने सर्व समाज एवं आदिवासी समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस गौरवमयी आयोजन को सफल बनाएँ।

 

कार्यक्रम की रूपरेखा एवं समय सारणी

 

​स्थान: टेक्निकल ग्राउंड, शहडोल (मत्स्य पालन के सामने)

​भव्य रैली: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चांपा से निकलने वाली भव्य रैली होगी। इसमें समाज के लोग अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर नृत्य करते हुए टेक्निकल ग्राउंड तक पहुँचेंगे।

​गोंगों पूजा: प्रातः 10:00 बजे से प्रकृति पूजन एवं गोंगों पूजा का आयोजन किया जाएगा।

​सांस्कृतिक एवं मंचीय कार्यक्रम: दोपहर 02:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी।

​‘जय सेवा, जय जोहार’ और ‘जय संविधान’ का संदेश

​कार्यक्रम के माध्यम से समाज को “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का मूल मंत्र देते हुए युवाओं और बच्चों को शिक्षा व अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। मंचीय कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय कलाकार, छात्र-छात्राएं और लोक गायक अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए जनजातीय संस्कृति की छटा बिखेरेंगे।

​पूर्व सरपंच शीतल सिंह टेकाम ने क्षेत्र के सभी सम्मानित नागरिकों, युवाओं, पत्रकारों और समाजबंधुओं को इस पावन अवसर पर गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने का सादर आमंत्रण दिया है।

 

         अजय पाल

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