डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
*रमपुरी मे करोड़ों के आश्रम निर्माण पर उठे सवाल: बिना तकनीकी निगरानी के चल रहा कार्य, गुणवत्ता पर ग्रामीणों की चिंता*
शहपुरा (डिंडौरी)। विकासखंड शहपुरा के ग्राम बिछिया रमपुरी में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन आश्रम भवन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों की अनदेखी कर कराया जा रहा है, जिससे भवन की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण स्थल पर न तो किसी तकनीकी सलाहकार अथवा इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है और न ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए आवश्यक लैब उपकरण उपलब्ध हैं। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में संशय बना हुआ है।
आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही एजेंसी द्वारा शासन के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर परियोजना संबंधी सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जबकि नियमानुसार निर्माण कार्य की लागत, विभाग, कार्य एजेंसी तथा अन्य आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य होता है। सूचना बोर्ड के अभाव में ग्रामीणों को परियोजना से जुड़ी बुनियादी जानकारी तक नहीं मिल पा रही है।
*पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल*
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है। साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने के कारण निर्माण की गुणवत्ता को लेकर आशंकाएं और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार मनमाने तरीके से कार्य करवा रहा है और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है।
*जांच और कार्रवाई की मांग*
ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराए जाने तथा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।
इनका कहना है
“निर्माण स्थल पर तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। करोड़ों रुपये की परियोजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को जांच करानी चाहिए।” —
स्थानीय ग्रामीण
अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा निर्माण कार्य में लगाए गए आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं।







