डिंडौरी मध्यप्रदेश

बीएसी की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद रिक्त पद नहीं होने के आरोप, पदस्थापना आदेश और ज्वाइनिंग की निष्पक्ष जांच की मांग।

डिंडौरी। जनपद शिक्षा केंद्र शहपुरा अंतर्गत पूर्व जनपद माध्यमिक शाला में शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। विद्यालय की दर्ज संख्या महज 42 बताई जा रही है, जबकि यहां पांच शिक्षकों की पदस्थापना का मामला सामने आया है। आरोप है कि बीएसी की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद विद्यालय में रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने के बावजूद संबंधित शिक्षक की पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए गए।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों में अंजू नामदेव (माध्यमिक शिक्षक-सामाजिक विज्ञान), ऋचा चौरसिया (माध्यमिक शिक्षक-गणित), निधि श्रीवास्तव (माध्यमिक शिक्षक-विज्ञान), मेवालाल मरावी (प्राथमिक शिक्षक) और राजकुमार गुप्ता (माध्यमिक शिक्षक-विज्ञान) के नाम शामिल हैं। ऐसे में विद्यालय की दर्ज संख्या, स्वीकृत पदों और विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आरटीई के प्रावधानों के तहत पद संरचना पर सवाल

शिकायत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत कक्षा 6 से 8 तक की माध्यमिक शालाओं के लिए निर्धारित शिक्षक पद संरचना का हवाला दिया गया है। आरोप है कि 100 से कम दर्ज संख्या वाले विद्यालय में गणित एवं विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी विषय के लिए निर्धारित शिक्षकों के अनुसार पदस्थापना होनी चाहिए। ऐसे में 42 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में पांच शिक्षकों की पदस्थापना और दो विज्ञान शिक्षकों की मौजूदगी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, वास्तविक स्थिति विद्यालय की स्वीकृत पद संरचना, लागू विभागीय नियमों और विषयवार कार्यभार के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

पदस्थापना आदेश और ज्वाइनिंग पर भी उठे सवाल

मामले में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग डिंडौरी द्वारा जारी पदस्थापना आदेश की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं संकुल प्राचार्य शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डी.के. श्रीवास्तव की भूमिका भी शिकायत के दायरे में है। आरोप है कि विद्यालय में रिक्त पद नहीं होने के बावजूद संबंधित शिक्षक को ज्वाइन कराया गया। ऐसे में यह जांच का विषय है कि पदस्थापना किस स्वीकृत रिक्त पद के विरुद्ध की गई और ज्वाइनिंग के समय किन अभिलेखों का परीक्षण किया गया।

जरूरतमंद विद्यालयों की अनदेखी क्यों?

इस मामले का दूसरा पहलू जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शून्य और एक शिक्षकीय विद्यालय हैं, जहां शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके बावजूद पहले से शिक्षक उपलब्ध विद्यालय में अतिरिक्त पदस्थापना किए जाने के आरोप ने विभागीय व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

मामले में जिला प्रशासन एवं सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग से पदस्थापना आदेश, विद्यालय की स्वीकृत पद संरचना, विषयवार शिक्षकों की संख्या, रिक्त पदों की स्थिति और ज्वाइनिंग से संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही जिले के शून्य एवं एक शिक्षकीय विद्यालयों की पहचान कर वहां आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की पदस्थापना सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में अभिलेखों के आधार पर जांच कर पदस्थापना की वैधानिकता स्पष्ट करता है या फिर यह मामला भी विभागीय प्रक्रिया तक सीमित रह जाता है।

रिपोर्ट अखिलेश झारिया

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