डिंडौरी मध्यप्रदेश

रिपोर्ट अखिलेश झारिया

 

करौंदी में निर्माण कार्य को लेकर उठे सवाल; ग्रामीण बोले—गांव में मजदूर मौजूद तो मशीनों की जरूरत क्यों? ऐसे कैसे रुकेगा पलायन

 

डिंडौरी/शहपुरा।  ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों को गांव में ही काम उपलब्ध कराने की शासन की मंशा के बीच शहपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत करौंदी में अलग तस्वीर सामने आई है। यहां श्मशान घाट तक बनाई जा रही सीसी रोड के निर्माण में स्थानीय मजदूरों की जगह मशीनों का इस्तेमाल किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि गांव में काम की जरूरत वाले मजदूर मौजूद होने के बावजूद निर्माण कार्य मशीनों से कराया जा रहा है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि शासन की VB-GRAMG योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका मजबूत करना और रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करना है। ऐसे में पंचायत स्तर के निर्माण कार्यों में भी यदि मजदूरों के बजाय मशीनों को प्राथमिकता मिलेगी, तो स्थानीय श्रमिकों को रोजगार आखिर कहां से मिलेगा? ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब गांव का मजदूर काम की तलाश में बैठा है और दूसरी तरफ गांव के विकास कार्य मशीनों से कराए जा रहे हैं, तो क्षेत्र से मजदूरों का पलायन कैसे रुकेगा?

 

मशीनों से काम, मजदूरों के हाथ खाली

 

ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों से स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिलने की उम्मीद रहती है। गांव और आसपास बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी आजीविका मजदूरी पर निर्भर है। रोजगार नहीं मिलने पर इन्हें दूसरे शहरों और जिलों की ओर काम की तलाश में जाना पड़ता है।

 

ऐसे में श्मशान घाट की सीसी रोड के निर्माण में मशीनों के इस्तेमाल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यही कार्य स्थानीय श्रमिकों से कराया जाता तो गांव के कई परिवारों को रोजगार मिलता और निर्माण पर खर्च होने वाली राशि का एक हिस्सा मजदूरी के रूप में स्थानीय परिवारों तक पहुंचता।

 

एक तरफ पलायन रोकने की कवायद, दूसरी तरफ मशीनों पर भरोसा?

 

शासन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और पलायन रोकने की दिशा में योजनाएं संचालित कर रहा है। लेकिन करौंदी में सामने आई स्थिति इन प्रयासों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब गांव में होने वाले रोजगारपरक कार्यों में स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

 

सवाल यह भी है कि  यदि पंचायतों के निर्माण कार्य मशीनों के भरोसे होंगे तो स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने का दावा धरातल पर कैसे उतरेगा?  ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह मशीनों से कार्य कराया जाना शासन की रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा को ही कमजोर करता दिखाई दे रहा है।

 

सीसी रोड की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल

 

ग्रामीणों ने रोजगार के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि श्मशान घाट तक बनने वाली सीसी रोड सार्वजनिक उपयोग का महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में निर्माण निर्धारित तकनीकी मापदंडों, स्वीकृत प्राक्कलन और गुणवत्ता के अनुरूप होना जरूरी है, ताकि कुछ समय बाद ही सड़क खराब न हो।

 

ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री, सीसी की मोटाई और निर्माण प्रक्रिया की तकनीकी जांच कराने की मांग भी उठाई है।

 

जांच हो तो सामने आएगी वास्तविकता

 

ग्रामीणों ने जनपद पंचायत एवं संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से निर्माण स्थल का निरीक्षण करने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य किस योजना और मद से स्वीकृत है, कार्य में मशीनों के इस्तेमाल का क्या प्रावधान है तथा स्थानीय श्रमिकों को रोजगार क्यों नहीं दिया गया।

 

अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी निर्माण स्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों की जांच करते हैं या मशीनों के सहारे निर्माण कार्य इसी तरह जारी रहता है। फिलहाल करौंदी के श्मशान घाट की सीसी रोड ने  “गांव में रोजगार और पलायन रोकने” की सरकारी मंशा बनाम जमीनी क्रियान्वयन  पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।

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