डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल बरगांव में कैरियर काउंसलिंग कार्यक्रम, विज्ञान-गणित के विद्यार्थियों में दिखा उत्साह

शहपुरा/बरगांव, 20 सितंबर 2026। विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप सही कैरियर चुनने तथा नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल, बरगांव में रविवार को कैरियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विज्ञान एवं गणित संकाय के 200 से अधिक विद्यार्थी और शिक्षक शामिल हुए। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर अध्ययन की रणनीति, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, तर्कशक्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के गुर बताए।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अध्यक्ष मनोहर लाल साहू ने सेवा प्रकल्प की गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों का कैरियर गाइडेंस के प्रति खासा उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से नीट, जेईई सहित उच्च शिक्षा और विभिन्न कैरियर विकल्पों से जुड़े सवाल भी पूछे।

नीट के लिए NCERT पर फोकस और नियमित रिवीजन जरूरी

पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज असाठी ने विद्यार्थियों को नीट की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन देते हुए कहा कि सफलता के लिए कठिन परिश्रम के साथ पुराने प्रश्न-पत्रों का अभ्यास, नियमित अध्ययन, ग्रुप स्टडी और समय-समय पर रिवीजन बेहद जरूरी है। उन्होंने नीट की तैयारी में एनसीईआरटी पर विशेष ध्यान देने और सकारात्मक सोच के साथ लगातार प्रयास करने की सलाह दी।

आईआईटी इंदौर के गोल्ड मेडलिस्ट सतीश ने विद्यार्थियों से कहा कि वे जिस भी विषय की तैयारी करें, उसे पूरी रुचि और लगन से समझकर पढ़ें। विज्ञान एवं गणित में केवल याद करने के बजाय अवधारणाओं को समझने, अधिक से अधिक प्रश्न पूछने और स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर अध्ययन करने पर उन्होंने जोर दिया।

‘दूसरों से नहीं, खुद से करें प्रतिस्पर्धा’

डॉ. अमित जैन ने सफलता के चार स्तंभ—द्रव्य, काल, भाव और क्षेत्र—के माध्यम से लक्ष्य निर्धारण और समय के सदुपयोग के बारे में समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं बल्कि स्वयं से होनी चाहिए। कठिन विषयों को सरल और रोचक तरीके से समझने तथा रचनात्मकता विकसित करने की भी सलाह दी।

कॉग्निक आईटी कंपनी के सीईओ ज्ञानेंद्र सिंह ने नियमित अभ्यास और स्मरण शक्ति के महत्व को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि किसी कार्य को लगातार करने से वह धीरे-धीरे आदत और स्मृति का हिस्सा बन जाता है। विद्यार्थियों को सुबह जल्दी उठकर अध्ययन करने और लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. खुशबू गुलवानी (बीएएमएस) ने विद्यार्थियों को तर्कशक्ति विकसित करने के साथ सही सोच, समझ और निरंतर प्रयास को सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने नीट के अलावा बीडीएस, आयुर्वेद और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों में उपलब्ध कैरियर संभावनाओं के संबंध में भी जानकारी दी।

विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दूर की जिज्ञासाएं

कार्यक्रम के दौरान हायर सेकेंडरी स्कूलों एवं नर्मदांचल विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने कैरियर, प्रतियोगी परीक्षाओं और अध्ययन से संबंधित कई सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। विशेषज्ञों ने सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी रुचि, क्षमता और लक्ष्य के अनुरूप सही दिशा प्रदान करना रहा।

एसडीएम शहपुरा फरहान इरफान जमादार के निर्देशन एवं सहायक संचालक शिक्षा प्रवीण तिवारी के मार्गदर्शन में शहपुरा विकासखंड के हायर सेकेंडरी स्कूलों को विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा नीट-जेईई की तैयारी के उद्देश्य से कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निर्देशित किया गया था।

कार्यक्रम की योजना अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले के विशेष निर्देशन में तैयार की गई। आयोजन में कैरियर गाइडेंस उपसमिति के संयोजक सिद्धार्थ गौतम, सदस्य अश्विनी साहू, धरम सिंह मरावी, दीपक द्विवेदी, हरिदर्शन चौकसे और पंचम सनोडिया सहित शासकीय एवं निजी विद्यालयों के प्राचार्यों ने सहयोग किया। मंच संचालन अश्विनी साहू ने किया।

ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में डॉ. पंकज असाठी, सतीश, मनोहर लाल साहू, ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. अमित जैन, डॉ. अंकित पटेल, डॉ. खुशबू गुलवानी, त्रिवेष अहिरवार, प्रशिक्षण अधिकारी विक्रम सिंह, जाम सिंह, सतीश चौबे, सिद्धार्थ गौतम, धर्म सिंह मरावी, सुरभि पाण्डे, प्राचार्य कृष्ण कुमार साहू, अरविंद यादव, जय साहू, संतोष प्रजापति, रणजीत सिंह, राधेश्याम साहू, चित्रा धुर्वे, वंदना साहू, शिवम झारिया, रीतेश साहू, गगन हरिनखेड़े, विजय सोनी, परसराम माथुने, अनुज उइके, प्रभाकर गौतम और मनोज साहू सहित शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यालयों से विद्यार्थियों को कार्यक्रम स्थल तक लाने और वापस ले जाने में भी शिक्षकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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