ग्राम पंचायत मुहनिया नीम में बिना हस्ताक्षर लगे बिलों का मामला उजागर, नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए बिल, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
कटनी -बहोरीबंद
जनपद पंचायत बहोरीबंद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुहनिया नीम में पंचायत संचालन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। ग्राम पंचायत में हाल ही में कई ऐसे बिल लगाए गए हैं जिन पर न तो सरपंच के हस्ताक्षर हैं और न ही पंचायत सचिव के, बावजूद इसके वे बिल पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए गए। यह पूरा मामला न सिर्फ पंचायत राज अधिनियम के नियमों का उल्लंघन है बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्राम पंचायतों में किसी भी प्रकार के खर्च, भुगतान, कार्य आदेश, सामग्री क्रय अथवा सेवा के बदले में जारी होने वाले बिलों पर सरपंच और सचिव दोनों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, फर्जी भुगतान या काल्पनिक कार्यों को रोका जा सके। लेकिन मुहनिया नीम पंचायत में जिस प्रकार बिल लगाए गए हैं, उससे ग्रामीणों सहित अनेक सामाजिक संगठनों में नाराज़गी बढ़नी शुरू हो गई है।
कानूनी स्थिति नियम क्या कहते हैं?
मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम और पंचायत लेखा नियमावली के अनुसार किसी भी भुगतान के लिए सरपंच व सचिव दोनों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। बिल पास होने से पहले गांव की बैठक में प्रस्ताव पारित होना चाहिए। जिस मद से भुगतान होना है उसका प्रस्ताव पंजी में दर्ज होना आवश्यक है। बिलों की प्रतिलिपि जनपद पंचायत को भेजी जाती है। यदि बिना हस्ताक्षर बिल लगाए जाएं तो वह अवैध व्यय की श्रेणी में आते हैं। ऐसी स्थिति में वित्तीय अनियमितता, दुरुपयोग, गबन, या फर्जी भुगतान की धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है।इस प्रकार यह मामला सीधा-सीधा नियम विरुद्ध कार्यवाही दर्शाता है।
ग्रामीणों की मांग उच्चस्तरीय जांच हो
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मांग की है कि जनपद पंचायत बहोरीबंद तत्काल मामले की जांच करे आरोपियों पर कार्रवाई की जाए भविष्य में पंचायत की सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया जाए हर बैठक का ब्योरा सार्वजनिक रूप से चस्पा किया जाए पंचायत की ऑनलाइन प्रणाली को मजबूत किया जाए कुछ ग्रामीणों ने यहां तक कहा है कि इस तरह की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं जब तक कि दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
यह भी चर्चा है कि अगर पंचायत में लंबे समय से बिलों में अनियमितता हो रही है, तो क्या जनपद का ऑडिट विभाग सोया हुआ था? क्या लेखा शाखा की भूमिका संदेहास्पद है? क्या कार्रवाई में देरी जानबूझकर की जा रही है? प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर ऐसी लापरवाही कैसे हुई और कौन जिम्मेदार है।
🖋️ पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट

