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मुनिराज श्री ऋषभ रत्नविजयजी ने आज प्रवचन में धर्म और कर्म के प्रभाव की स्थिति का विवेचन किया।


इंदौर मध्य प्रदेश

कर्म के प्रभाव से दुर्गति हो और कोई बचा ले वह धर्म का प्रभाव है जो केवल बचाता ही नहीं है वरन सुख, सुरक्षा एवं सद्गति भी देता है। धर्म तीन प्रकार से होता है दबाव, प्रभाव एवं स्वभाव। दबाव वश एवं चमत्कार के प्रभाव में आकर किया धर्म, धर्म नहीं है। जब धर्म करते हुए जीवन के कषाय शांत हो जायें और पाप मिट जायें तब स्वभाव से धर्म कहलाता है। दबाव एवं प्रभाव से किया धर्म अल्पकालीन है एवं स्वभाव से किया धर्म जन्म-जन्म तक साथ देता है। एक कहावत है “सुखम धर्मार्थ दुखम पापार्थ” अर्थात धर्म प्रभाव से सुख एवं पाप प्रभाव से दुःख आता है। पापों से बचने की उपाय करें।
प्रथम : चेक करो – इसकी जाँच करें कि, हमारे जीवन में दुःख क्यों आया या किस कारण से है। अर्थात कौनसा पाप हुआ है।, द्वितीय : ट्रेक करो – यह ट्रेक रखें कि पाप में किन-किन कारणों का संयोग था एवं किन परिस्थितियों में पाप हुआ है। किस मार्ग पर चलकर यह पाप हुआ है। एवं तृतीय : बेक करो – जिस परिस्थिति में पाप हुआ है उससे धर्म में वापसी करके तप साधना में लग जाओ।
गुरु भगवंत की प्रेरणा से आचरण करना मतलब उनके प्रति ‘रेस्पॉन्स’ है, यदि कहा हुआ नहीं करा वह ‘नौ रेस्पॉन्स’, कहा हुआ करने में विलंब या ताल-मटोल किया तो ‘डिलै रेस्पॉन्स’ और जो कहा गया है उसके विपरीत कार्य करना ‘रिवर्स रेस्पॉन्स’ है। अतः यह तय करना है कि, हम कहाँ हैं। जब जीवन में संकट/परेशानी आ जाये तब मन की चिंता दूर करने के लिये निम्न सूत्र का पालन करें तो समस्या दूर हो जाएगी।
1. मेरे संकट का कोई समाधान नहीं है, केवल में ही इस संकट को समाप्त कर सकता हूँ एवं 2. मेरे जैसा कोई सुखी नहीं है, क्योंकि संसार में मुझसे कई अधिक दुःख वाले लोग हैं।
शस्त्रों में वर्णित किया है प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में धर्म चिंतन करना चाहिये। संसार में ना-ना प्रकार के लोग हैं उनको सुधार नहीं सकते हैं बल्कि स्वयं को सुधरना होगा। हमारे दो चेहरे होते हैं एक पब्लिक को दिखाने वाला जिसमें हम अपने दोष छिपा लेते हैं और दूसरा पर्सनल चेहरा जिसमें अपने दोष स्वयं देखते है इसलिये हम अपने दोषों को दूर कर लें इसी में स्वयं एवं संसार का हित है। राजेश जैन युवा ने बताया की
आजकल के वातावरण में फिट बैठने वाले प्रवचन मुनिवर दे रहे है सभी लाभ लेवें। मुकेश पोरवाल, समिति सचिव ने जानकारी दी दिनाँक 22 अगस्त को विशाल सिद्धि तप पूर्ण होने पर सभी सिद्धि तपस्वियों का पारणा है जिसकी तैयारी जोर-शोर से जारी है एवं तप प्रभावना में सहयोग करने के इच्छुक धर्म प्रेमी अपने नाम समिति को दे सकते है। इस अवसर पर तपन शाह, सुरेन्द्र वोहरा, निलेष पोरवाल, रवि बाठीयाँ, साधना जैन एवं साधना नाहर एवं अच्छी संख्या में पुरुष व महिलायें उपस्थित थीं।
भवदीय
राजेश जैन युवा
94250-65959 रिपोर्ट अनिल भंडारी

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