डिंडौरी मध्यप्रदेश

रिपोर्ट अखिलेश झारिया

 

 

लंबित मजदूरी और लागत राशि तत्काल देने की मांग, पीएम पोषण की राशि ₹20 से बढ़ाकर ₹25 करने सहित बीमा-पेंशन की उठी मांग

 

डिंडौरी। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ जिला डिंडौरी ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम 15 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए लंबित भुगतान, बढ़ती महंगाई के अनुरूप भोजन की लागत राशि बढ़ाने, रसोइया बहनों की मजदूरी समय पर देने तथा बीमा-पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

महासंघ की जिला अध्यक्ष संतोषी दिनेश परस्ते की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि महिला स्व-सहायता समूह एवं रसोइया बहनें वर्षों से विद्यालयों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें लागत राशि, मजदूरी, खाद्यान्न, ईंधन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने इन समस्याओं के निराकरण के लिए जिला पंचायत स्तर से आवश्यक पहल करने की मांग की है।

तीन वर्षों की लंबित 15 दिन की राशि का मुद्दा उठाया

 

ज्ञापन में वर्ष 2024, 2025 एवं 2026 की जून माह की 15 दिवस की लंबित राशि तत्काल उपलब्ध कराने की मांग प्रमुखता से रखी गई है। संगठन का कहना है कि लगभग  ₹23 हजार की राशि रसोइया बहनों से संबंधित है , जिसका पिछले तीन वर्षों से भुगतान नहीं हो पाया है। मामले की निष्पक्ष जांच कर लंबित राशि शीघ्र दिलाए जाने की मांग की गई है।

 

इसके साथ ही जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह की लंबित लागत राशि तथा रसोइया बहनों की मजदूरी तत्काल जारी करने और भविष्य में प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ राशि जारी करने की व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी गई है।

 

₹20 की भोजन लागत को ₹25 प्रति विद्यार्थी करने की मांग

 

महासंघ ने बढ़ती महंगाई और खाद्य सामग्री की कीमतों का हवाला देते हुए पीएम पोषण योजना के तहत वर्तमान लागत राशि को ₹20 से बढ़ाकर ₹25 प्रति विद्यार्थी  करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों के बीच मौजूदा राशि में निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने में समूहों को कठिनाई हो रही है।

 

ज्ञापन में विद्यालय पोर्टल पर दर्ज वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर शत-प्रतिशत लागत राशि एवं खाद्यान्न उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। संगठन के अनुसार वर्तमान में वास्तविक दर्ज छात्र संख्या के मुकाबले 50 प्रतिशत तक राशि एवं खाद्यान्न मिलने से व्यवस्था प्रभावित होती है।

 

ऑनलाइन व्हाट्सएप हाजिरी बंद करने की मांग

 

महिला स्व-सहायता समूहों ने रसोइया बहनों की ऑनलाइन/व्हाट्सएप हाजिरी की व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी उठाई है। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी के लिए निर्धारित लागत राशि का स्पष्ट  मेनू चार्ट प्रदर्शित करने की मांग की गई है, ताकि विद्यार्थी, अभिभावक और जनप्रतिनिधि यह जान सकें कि निर्धारित राशि में समूहों द्वारा कितना पौष्टिक एवं मेनू के अनुरूप भोजन दिया जा रहा है।

 

सेवा आयु 65 वर्ष करने, बीमा-पेंशन की भी मांग

 

ज्ञापन में रसोइया बहनों की सेवा अवधि 60 वर्ष से बढ़ाकर  65 वर्ष करने, रसोइया बहनों एवं समूहों के अध्यक्ष-सचिव के लिए  बीमा एवं पेंशन  की व्यवस्था करने और समूह अध्यक्ष एवं सचिव को मासिक मानदेय दिए जाने की मांग रखी गई है।

 

इसके अलावा लगातार बढ़ती गैस सिलेंडर की कीमतों को देखते हुए गैस सिलेंडर पर सब्सिडी उपलब्ध कराने, रसोई गैस की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने और जर्जर किचन शेड के स्थान पर नए किचन शेड निर्माण की मांग भी की गई है।

 

52 किलो प्रति बोरी के हिसाब से खाद्यान्न देने की मांग

 

महासंघ ने खाद्यान्न की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में सड़ा-गला एवं घटिया किस्म का चावल न देकर गुणवत्तापूर्ण एवं फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही आवंटित मात्रा के अनुरूप खाद्यान्न दिए जाने तथा  52 किलोग्राम प्रति बोरी के स्थान पर 48 से 45 किलोग्राम तक खाद्यान्न मिलने की समस्या दूर कर सही तौल के साथ पूरा खाद्यान्न उपलब्ध कराने  की मांग की गई है।

 

महासंघ ने जिला पंचायत प्रशासन से सभी 15 मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जिला स्तर पर जिन समस्याओं का समाधान संभव है, उन पर तत्काल कार्रवाई और शासन स्तर की मांगों को सक्षम स्तर तक भेजने की मांग की है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि महिला स्व-सहायता समूहों एवं रसोइया बहनों की समस्याओं के निराकरण के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी।

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