डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
33 केवी सब स्टेशन लाइन निर्माण में विभाग-ठेकेदार की मिलीभगत की चर्चा तेज
शहपुरा। डिंडोरी जिले के शहपुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम मानिकपुर तक प्रस्तावित 33 केवी विद्युत लाइन निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। हाल ही में आई हल्की आंधी और तेज हवा में नई लाइन के लिए लगाए गए कई बिजली पोल धराशायी हो गए, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में ठेकेदार और विद्युत विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लाइन निर्माण में शुरू से ही भारी अनियमितता बरती जा रही थी। पोल खड़े करने के दौरान न तो मानक तकनीकी प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही मजबूती के लिए आवश्यक पीएससी बेस का सही उपयोग किया गया। परिणामस्वरूप, जिन पोलों पर अभी विद्युत सप्लाई भी शुरू नहीं हुई थी, वे पहली ही आंधी का दबाव नहीं झेल सके और जमीन पर गिर पड़े।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तभी गुणवत्ता को लेकर विभागीय अधिकारियों को मौखिक शिकायतें दी गई थीं। ग्रामीणों ने बताया कि कई स्थानों पर पोलों की गहराई और मजबूती को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय अनदेखा कर दिया। अब पोल गिरने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा जल्दबाजी और लागत बचाने के उद्देश्य से मानकों को ताक पर रखकर कार्य कराया गया। लोगों का कहना है कि बिना मजबूत आधार के खड़े किए गए पोल भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। यदि लाइन चालू होने के बाद ऐसा हादसा होता, तो जान-माल का नुकसान भी संभव था।
गौरतलब है कि मानिकपुर में बनने वाले नए 33 केवी सब स्टेशन का भूमिपूजन क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश धुर्वे द्वारा बड़े उत्साह के साथ किया गया था। इस परियोजना से क्षेत्र की बिजली व्यवस्था मजबूत होने और ग्रामीणों को बेहतर विद्युत सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन निर्माण कार्य की शुरुआती अवस्था में ही सामने आई कथित लापरवाही ने पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
