डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
सड़कें बनी तालाब, घरों में घुसा नाली का पानी, अधूरा डिवाइडर बना हादसों की वजह
सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के सामने जलभराव से जनता बेहाल, लोगों ने कहा– “प्रशासन हादसे का कर रहा इंतजार”
शहपुरा। शुक्रवार दोपहर बाद हुई बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं शहपुरा नगर परिषद की व्यवस्थाओं की हकीकत भी उजागर कर दी। मानसून की पहली ही बारिश में पूरा नगर जलमग्न नजर आया। शहर के कई प्रमुख मार्गों, मोहल्लों और वार्डों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और लोगों को घंटों तक गंदे पानी व कीचड़ के बीच आवागमन करना पड़ा। बारिश रुकने के कई घंटे बाद भी सड़कों पर पानी जमा रहा, जिससे नगर परिषद के दावों की पोल खुल गई।
नगर के वार्ड क्रमांक 1 डिंडोरी रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने, चक्रवर्ती मोहल्ला, शहीद स्मारक क्षेत्र सहित कई इलाकों में हालात बेहद खराब रहे। कई जगहों पर नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया। लोगों का कहना है कि हर वर्ष नगर परिषद बारिश से पहले जलनिकासी और सफाई व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पहली बारिश में ही सारी तैयारियां धराशायी हो जाती हैं।
सेंट्रल बैंक के सामने सड़क बनी मुसीबत
नगर के मुख्य मार्ग पर सेंट्रल बैंक के सामने पिछले कई दिनों से जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी हुई है। लगातार पानी जमा रहने से सड़क दलदल में तब्दील हो गई है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर परिषद द्वारा न तो पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था की गई और न ही सड़क सुधार का कार्य कराया गया। व्यस्त सड़क पर फैले कीचड़ और गंदे पानी के कारण पैदल राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया वाहन चालक हर दिन फिसलने और दुर्घटना के खतरे के बीच आवागमन करने को मजबूर हैं।
व्यापारियों ने बताया कि जलभराव के कारण ग्राहकों का आना-जाना प्रभावित हो रहा है और दुकानों के सामने फैले कीचड़ से व्यापार पर भी असर पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि परिषद के अधिकारी केवल बैठकों और कागजी निरीक्षण तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हालात बदहाल पड़े हैं।
अधूरा डिवाइडर बना दुर्घटनाओं का कारण
नगर में हाथी द्वार से बटौना तिराहा तक सड़क के बीच बनाए जा रहे डिवाइडर ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। निर्माण कार्य के दौरान डाली गई मिट्टी बारिश में सड़क पर फैल गई, जिससे पूरे मार्ग में फिसलन की स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार बीते दो दिनों में करीब आधा सैकड़ा लोग फिसलकर सड़क पर गिर चुके हैं। इससे पहले भी यह डिवाइडर कई दुर्घटनाओं का कारण बन चुका है।
लोगों का कहना है कि डिवाइडर निर्माण कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। बारिश के दौरान मिट्टी सड़क पर बहने से वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर रात के समय हालात और ज्यादा गंभीर हो जाते हैं।
बैंक ऑफ इंडिया के सामने बना “तालाब”
डिवाइडर निर्माण और खराब जलनिकासी व्यवस्था के कारण बैंक ऑफ इंडिया के सामने सड़क पूरी तरह जलमग्न हो गई। यहां इतना पानी भर गया कि छोटी गाड़ियों के टायर तक डूब गए। पैदल चलने वाले लोगों को घुटनों तक पानी में उतरकर रास्ता पार करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही जलनिकासी और सड़क सुधार का कार्य नहीं हुआ तो आगामी बारिश में हालात और भयावह हो सकते हैं।
“क्या नगर परिषद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही?”
नागरिकों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि परिषद केवल कागजों में विकास कार्य दिखाने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता परेशान हो रही है।
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो नगर परिषद के खिलाफ जन आंदोलन किया जाएगा। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है? यदि इसी तरह सड़क पर पानी और कीचड़ जमा रहा, तो किसी दिन बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।
