शहडोल:दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में लोको पायलटों (रनिंग स्टाफ) का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। प्रशासन के प्रताड़नात्मक रवैये, असुरक्षित कार्यप्रणाली और रनिंग रूम्स में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी के विरोध में ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के आह्वान पर एकीकृत क्रू लॉबी शहडोल के समक्ष सैकड़ों रनिंग स्टाफ 8 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
बिजुरी में 4 सितंबर से चल रहे आंदोलन के बाद अब पूरे बिलासपुर मंडल के सभी क्रू मुख्यालयों पर यह चिंगारी फैल चुकी है।
असुरक्षित कार्यप्रणाली और 12-14 घंटे की थकाऊ ड्यूटी
धरना स्थल से यूनियन
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि लोको रनिंग स्टाफ दिन-रात एक करके सर्वाधिक लदान और यातायात का कीर्तिमान स्थापित करता है, फिर भी उनके साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है:
नियमों की धज्जियां: निर्धारित 9 घंटे के ड्यूटी नियम को ताक पर रखकर 12 से 14 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है।
असुरक्षित शंटिंग: स्टेशनों और साइडिंगों में पर्याप्त शंटिंग स्टाफ न होने के कारण शॉर्ट-कट पद्धतियों से जबरन शंटिंग कराई जाती है, जिससे संरक्षा हमेशा दांव पर रहती है।
संवादहीनता और दमन: Sr. DEE (OP) के साथ पूर्ण संवादहीनता का माहौल है। आधारहीन कारणों पर 3-3 वर्ष तक की वेतनवृद्धि रोकने और चार्जशीट देने का भय बनाकर स्टाफ से काम लिया जा रहा है।
आवाज उठाने पर ट्रांसफर की सजा
कर्मचारियों ने खुलकर प्रशासनिक प्रतिशोध की घटनाओं को सामने रखा:
कच्चे खाने की शिकायत पर सजा: शहडोल के लोको पायलट ए. के. पाल ने रनिंग रूम में घटिया और कच्चे भोजन की शिकायत की, तो समाधान करने की बजाय उनका तबादला सूरजपुर कर दिया गया।
संरक्षा नियमों के पालन पर कार्रवाई: बिजुरी के लोको पायलट एम. के. विभूति द्वारा शंटिंग में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर प्रशासन ने उन्हें ब्रजराजनगर ट्रांसफर कर दिया।
AILRSA की प्रमुख मांगें
AILRSA शहडोल शाखा के अध्यक्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने प्रशासन के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं:
लोको पायलट एम. के. विभूति का दुर्भावनापूर्ण स्थानांतरण तत्काल रद्द हो।
साइन-ऑन से साइन-ऑफ तक अधिकतम 9 घंटे की ड्यूटी सुनिश्चित की जाए और अनैतिक चार्जशीट बंद हों।
रनिंग रूम में भोजन की गुणवत्ता में सुधार हो तथा ठेकेदारों को मिलने वाला अनुचित संरक्षण बंद किया जाए।
मुख्यालय से लगातार चौथी रात (4th Night) ड्यूटी भेजने और ड्यूटी ब्रेक की प्रथा तुरंत समाप्त की जाए।
नियमानुसार 30% लीव रिजर्व और 7वें दिन पीआर (Periodical Rest) सुनिश्चित किया जाए।
धरने पर बैठे रनिंग स्टाफ ने दो टूक कहा है कि उच्चाधिकारियों को बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी कोई न्यायोचित पहल नहीं हुई। जब तक प्रशासन तानाशाही रवैया छोड़कर संरक्षा व सम्मान की गारंटी नहीं देता, यह अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। अजय पाल
