डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
मुख्यमंत्री के बाद विधायक ने फिर काटा फीता, श्रेय की सियासत पर उठे सवाल; सड़क-पानी के बिना कैसे पहुंचेगा विद्यार्थी?
शहपुरा। डिंडौरी जिले के शहपुरा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिजौरी में करोड़ों की लागत से निर्मित सांदीपनि विद्यालय एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। शनिवार को क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने विद्यालय का लोकार्पण किया, जबकि दावा है कि इसी विद्यालय का लोकार्पण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पूर्व में वर्चुअल माध्यम से किया जा चुका है। ऐसे में एक ही भवन के दोबारा लोकार्पण को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह विकास कार्य के उद्घाटन से ज्यादा श्रेय लेने की सियासत का मामला है?
दो साल से तैयार भवन, 700 मीटर सड़क का इंतजार
सबसे बड़ा सवाल विद्यालय की मूलभूत सुविधाओं को लेकर है। बताया जा रहा है कि भवन करीब दो वर्ष पहले ही बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन मुख्य मार्ग से विद्यालय तक पहुंचने वाली लगभग 700 मीटर सड़क अब तक नहीं बन सकी है। बारिश के मौसम में विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने विद्यालय तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।
जब भवन दो साल से तैयार है तो अब तक पहुंच मार्ग क्यों नहीं बन पाया? क्या निर्माण से पहले सड़क और अन्य जरूरी सुविधाओं की योजना नहीं बनाई गई थी? ये सवाल अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
विद्यार्थियों ने पूछा सड़क कब बनेगी, विधायक ने कहा—’समय लगेगा’
लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सांदीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों ने विधायक ओमप्रकाश धुर्वे से सड़क सहित शहपुरा से विद्यालय तक आवागमन की सुविधा को लेकर सवाल किया। विधायक ने व्यवस्था जल्द होने की बात कही, लेकिन साथ ही कहा कि सभी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध नहीं हो सकतीं और धीरे-धीरे व्यवस्था की जाएगी।
अब सवाल यह है कि जब विद्यालय का भवन पहले ही तैयार हो चुका था, तो विद्यार्थियों की बुनियादी जरूरतों के लिए दो वर्ष का समय भी कम क्यों पड़ गया?
शिलालेख ने भी बढ़ाई सियासी चर्चा
कार्यक्रम में लगाए गए शिलालेख को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। शिलालेख में सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, विधायक ओमप्रकाश धुर्वे के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेता, जिला महामंत्री बद्री प्रसाद तथा भाजपा मंडल अध्यक्ष भजन चक्रवर्ती के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर निर्वाचित अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि विकास कार्य के शिलालेख पर दलगत पदाधिकारियों के नामों को प्राथमिकता देने का आधार क्या रहा?
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा
कार्यक्रम में जिला पंचायत शिक्षा समिति, जनपद पंचायत शिक्षा समिति के सभापति, ग्राम पंचायत सरपंच सहित अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। जिला पंचायत उपाध्यक्ष से जब कार्यक्रम को लेकर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं थी।
ऐसे में सवाल यह भी है कि करोड़ों की लागत से बने जिले के महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान के लोकार्पण कार्यक्रम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सूचना तक क्यों नहीं दी गई?
भीड़ जुटाने के लिए दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों को बुलाने का आरोप
कार्यक्रम में भीड़ बढ़ाने के लिए शहपुरा से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित शासकीय एक्सीलेंस विद्यालय के विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालय परिसर में लाए जाने की बात भी सामने आई है। यदि ऐसा हुआ है तो सवाल उठता है कि किसी शासकीय कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए दूसरे विद्यालय के विद्यार्थियों को लाना कितना उचित है?
इस संबंध में शासकीय एक्सीलेंस विद्यालय के प्राचार्य डीके श्रीवास्तव से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
लोकार्पण पर लोकार्पण, सुविधाएं अब भी अधूरी
सांदीपनि विद्यालय का दो बार लोकार्पण होना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ मंच से विकास और शिक्षा की बड़ी तस्वीर पेश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों के लिए सड़क, पानी और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव सवाल खड़े कर रहा है।
अब असली सवाल यही है—विद्यालय का फीता कितनी बार कटेगा और विद्यार्थियों के लिए 700 मीटर सड़क आखिर कब बनेगी? विकास के श्रेय की सियासत से आगे बढ़कर क्या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी अब विद्यार्थियों की सुविधा पर ध्यान देंगे, यह आने वाला समय बताएगा।

