डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
पड़रिया खुर्द में मेन्यू के विपरीत भोजन देने का आरोप, सूखे आम के टुकड़े मिलाने की शिकायत; ग्रामीणों ने एसडीएम से की जांच की मांग
डिंडोरी/शहपुरा। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द के आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले नाश्ते और भोजन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्रों में शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन और नाश्ता उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। वहीं भोजन में कथित तौर पर सूखे आम के टुकड़े (अंमकड़ियां) डालकर बच्चों को परोसे जाने की शिकायत भी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले करीब 15 दिनों तक बच्चों का भोजन बंद रहा। जब शासन की ओर से बच्चों के पोषण के लिए खाद्य सामग्री और भोजन की व्यवस्था की जाती है, तो फिर निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन क्यों नहीं मिल रहा—यह सवाल ग्रामीणों ने उठाया है।
एसडीएम और परियोजना अधिकारी को सौंपा आवेदन
मामले को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम राजस्व शहपुरा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी मौजूदगी में मौके पर कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अब तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इससे शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है।
स्टॉक से लेकर मेन्यू तक जांच की मांग
ग्रामीणों ने पड़रिया खुर्द के सभी आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों की अचानक जांच कराने की मांग की है। जांच के दौरान भोजन सामग्री का स्टॉक, वितरण रजिस्टर, निर्धारित मेन्यू, भोजन की गुणवत्ता तथा बच्चों को वितरित किए गए नाश्ते और भोजन का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की गई है।
साथ ही करीब 15 दिनों तक भोजन बंद रहने के आरोप की भी जांच की मांग की गई है।
बच्चों के पोषण से जुड़ा मामला, इसलिए जांच जरूरी
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू और वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का मामला सीधे बच्चों के पोषण से जुड़ा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि केंद्रों में व्यवस्था पूरी तरह नियमानुसार चल रही है तो शिकायत के बाद मौके पर पारदर्शी जांच कराने में क्या परेशानी है?
जांच होगी तो सामने आएगी हकीकत
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
हालांकि भोजन में अनियमितता, 15 दिनों तक भोजन बंद रहने और विभागीय लापरवाही से जुड़े आरोप फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
अब सवाल यही है—बच्चों के निवाले से जुड़ी शिकायत पर विभाग कब करेगा मौके की जांच और कब सामने आएगी पड़रिया खुर्द के आंगनबाड़ी केंद्रों की असली तस्वीर?

