भोपाल – हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं कि राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट…., अब कुछ लोगों ने इसे हकीकत में बदल दिया। पहले तो राम के नाम पर खूब वोट लूटे और अब नोट। चूंकि, पूरे खेल में रामजी का नाम लेने वाले ही शामिल हैं लिहाजा देशभर में खून नहीं खौल रहा है, किसी के घर बुलडोजर नहीं चल रहा। एक वक्त था जब राम जन्मभूमि स्थल के विवाद से लेकर शीर्ष अदालत के फैसले तक और फिर भूमिपूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक पूरे देश में अलग ही माहौल बना था। रामजन्म भूमि मंदिर को लेकर खूब प्रचार प्रसार हुआ यहां तक तो सब ठीक है लेकिन जब अयोध्या के विश्वप्रसिदध इस मंदिर के चंदे में हेराफेरी सामने आई तो राम भक्तों के साथ ही अन्य धर्मप्रेमियों को भी ठेस तो पहुंची ही है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर में चंदे की राशि के साथ ही चढ़ावे में आए जेवरात भी पार किए गए हैं। यही नहीं, असली सोना पार कर नकली भी रखा गया। हालांकि, अभी जांच चल रही है और पूरा खुलासा होना बाकी है। हकीकत और पूरी जानकारी तब ही सामने आ पाएगी जब निष्पक्षता से मामले की तह तक तफ्तीश की जाएगी। हेराफेरी करने का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा था। लेकिन, मोटा हाथ मारा गया महाकुंभ के वक्त। तब देश भर से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। इस दौरान रामभक्त काशी और अयोध्या में भी दर्शन के लिए पहुंचे थे और खूब चढ़ावा भी आया। महाकुंभ के दौरान एक-एक दिन में लाखों रूपये पार कर लिए गए।
दरअसल, किसी भी धार्मिक स्थल से चढ़ावे की रकम में हेराफेरी आस्था के साथ खिलवाड़ है। फिर ये कोई साधारण राम मंदिर तो है नहीं बल्कि ये वो मंदिर है जो भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। इस मंदिर निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए दशकों तक रामभक्तों ने संघर्ष किया है। ऐसे में रामभक्तों की आन-बान-शान का प्रतीक इस मंदिर से चढ़ावे की रकम का गबन अक्षम्य अपराध है। राम मंदिर की दान राशि में हुए गबन मामले ने रामभक्तों को हैरत में डाल दिया है। ये रकम 200 करोड़ से भी अधिक की बताई जा रही है। चूंकि, यूपी से लेकर केन्द्र तक रामभक्तों की सरकार है लिहाजा जो कार्रवाई हो भी रही है तो पूरी खामोशी के साथ। कार्रवाई के नाम पर एसआईटी बना दी गई है। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। हेराफेरी की गई राशि की रिकवरी की जा रही है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई जा रही है। कुछ लोगों ने अपने घर तो कुछ ने रिश्तेदारों या परिचितों के घरों में तो किसी ने गोबर के ढेर में नगदी छिपाई थी। जांच के आगे बढ़ने पर कुछ हजार रूपये महीने की पगार पर काम करने वाले कर्मचारियों के पास से करोड़ों रूपयों की संपत्ति सामने आ रही है।
अयोध्या राम मंदिर से दानराशि चोरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र याचिका भेजकर इस मामले पर स्वत संज्ञान लेते हुए कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अनूप अवस्थी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र याचिका भेजकर श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में दान-चढ़ावे की हेराफेरी से जुड़े आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है। मालूम हो कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का आरोप लगाया था। वहीं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने जांच पूरी होने तक न्यास के सभी मौजूदा सदस्यों को हटाए जाने की मांग की है। उन्होंने एसआईटी पर अविश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा कराई जानी चाहिए। राम मंदिर आंदोलन के नेता और पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने कहा कि हमारे जैसे लोग, कल्याण सिंह (उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री) सभी जेल गए। कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से केवल इसलिए इस्तीफा दे दिया था कि मंदिर का निर्माण शुरू हो। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि सनातन धर्म के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि अब राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और साधुओं की जांच अधिकारी करेंगे। यह सनातन धर्म का अपमान है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का कहना है कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे पूरा देश देख रहा है। इस मामले में देश माफ नहीं करने वाला है। पूर्व सांसद विनय कटियार का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट में जितने लोग है, सबके सब चोर हैं। सबको हटाओ। जांच हो रही है। ये सब या तो भाग जाएंगे या जेल में होंगे। इनकी छुट्टी कौन करेगा, आगे दिखेगा। गोपाल राव को ट्रस्ट में किसने भेजा ? राम मंदिर दान में कितने करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, यह सब जांच में पता चल जाएगा।
बहरहाल, क्या राशि की रिकवरी करने से रामभक्तों की आस्था पर पहुंची ठेस की भी रिकवरी हो पाएगी ?, क्या रामजन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि हेराफेरी करने वालों को रामभक्त सरकार सख्त सजा देगी ?, इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मंदिर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी नहीं है और है तो ये सब इतने दिनों तक कैसे चलता रहा ?, जिन लोगों का बात-बात पर खून खौल उठता था उनकी चुप्पी क्यूं हैं ?, क्या इस मामले के तार बड़े रसूखदारों या राजनीतिज्ञों से भी जुड़े हुए हैं ? और भी कई ऐसे सवाल हैं जो आस्थावानों के ज़हन में कौंध रहे हैं।
— मुस्ताअली बोहरा
अधिवक्ता एवं लेखक
भोपाल (मध्यप्रदेश)

