महासमुंद में जुटे सियासत के दिग्गज:प्रभारी मंत्री, सांसद और बसना विधायक ने किसानों को सिखाए प्राकृतिक खेती के गुर
बढ़ती लागत और बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगी सरकार : विधायक डॉ संपत अग्रवाल
*महासमुंद / बागबाहरा*। बदलते दौर में रसायनों के अत्यधिक उपयोग से बंजर होती धरती को बचाने और आम जनमानस को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए महासमुंद जिले में एक बड़ी पहल की गई है। जिला किसान मोर्चा के तत्वावधान में बागबाहरा के कृषि उपज मंडी प्रांगण में एक दिवसीय ‘प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन कार्यशाला’ का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के अनुरूप विधिवत् पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी एवं बसना विधानसभा के लोकप्रिय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल मुख्य रूप से मंच पर आसीन रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपनी पारंपरिक खेती की ओर लौटें। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से हमारी मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त हो रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल हम लागत कम कर सकते हैं, बल्कि देश के नागरिकों को जहरमुक्त और पौष्टिक अन्न भी प्रदान कर सकते हैं। सरकार इसके लिए किसानों को हर संभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशिष्ट अतिथि बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कार्यशाला में उपस्थित किसानों से बात करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अब केवल एक विकल्प नहीं रह गई है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और हमारी धरती मां की रक्षा के लिए आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
विधायक डॉ. अग्रवाल ने वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं को सामने रखते हुए कहा कि आज अस्पताल में जिस तरह मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसका एक बहुत बड़ा कारण हमारे भोजन में शामिल हो चुका रासायनिक जहर है। हम अपनी फसलों में जो कीटनाशक और यूरिया डाल रहे हैं, वह अप्रत्यक्ष रूप से हमारी और हमारे बच्चों की थाली में पहुंच रहा है। अगर हमें एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है, तो हमें गाय के गोबर और गौमूत्र पर आधारित जीवामृत और प्राकृतिक खादों को अपनाना होगा। इससे जमीन का ‘ऑर्गेनिक कार्बन’ बढ़ेगा और कम पानी में भी बेहतरीन फसल पैदा होगी।
मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि रासायनिक खेती से किसानों की लागत साल-दर-साल बढ़ती जा रही है, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। इसके विपरीत, प्राकृतिक खेती में बाजार से महंगी खाद या कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं होती। घर पर ही तैयार होने वाले इनपुट से लागत शून्य हो जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि आज वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक और प्राकृतिक रूप से उगाए गए अनाजों और सब्जियों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। यदि हमारे क्षेत्र के किसान इस पद्धति को पूरी तरह अपना लेते हैं, तो उनके उत्पादों को प्रीमियम दाम मिलेंगे। इससे देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप किसानों की आय को वास्तव में दोगुना और तिगुना किया जा सकेगा। विधायक डॉ. अग्रवाल ने क्षेत्र के किसानों को भरोसा दिलाया कि बसना और पूरे महासमुंद जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को एक बेहतर मार्केट प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए वे स्वयं व्यक्तिगत रूप से और शासन स्तर पर हर संभव प्रयास करेंगे।
कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत बनाने की लाइव विधि भी सिखाई गई। कार्यक्रम में संभाग सहप्रभारी राजीव सिंह,जिला अध्यक्ष भाजपा एतराम साहू, पूर्व विधायक पूनम चंद्राकर,पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू,अध्यक्ष बीज निगम चन्द्रहास चंद्राकर, पूर्व विधायक रामलाल चौहान, पूर्व विधायक प्रीतम सिंह दीवान,जिला महामंत्री थान सिंह दीवान, जिला महामंत्री जितेंद्र त्रिपाठी, अध्यक्ष जिला पंचायत मोंगरा पटेल,प्रदेश उपाध्यक्ष महिला मोर्चा अल्का चंद्राकर, अध्यक्ष किसान मोर्चा पिलेश्वर पटेल,जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा स्मिता हितेश चंद्राकर, वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेमशंकर पटेल,नरेश चंद्राकर,सतपाल सिंह छाबड़ा,मंडल अध्यक्ष डिम्पल डॉली ध्रुव,मंडल अध्यक्ष रूपेश साहू,मंच संचालक चंद्रशेखर ध्रुव,जिला मीडिया प्रभारी नवीन कुमार साव,सह मीडिया प्रभारी आनंद साहू,मंडल अध्यक्ष पिथौरा ग्रामीण नीलकंठ साहू,जिला महामंत्री किसान मोर्चा माधव साव,जिला महामंत्री किसान मोर्चा प्रदीप चंद्राकर,जिला किसान मोर्चा के पदाधिकारी, कृषि विभाग के आला अधिकारी सहित भारी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: मयंक श्रीवास्तव

