शहडोल। एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की बंगवार भूमिगत कोयला खदान में शुक्रवार को हुए दर्दनाक हादसे ने खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टॉपिंग वॉल निर्माण कार्य के दौरान खदान की छत धंसने से दो मजदूरों की मौत और चार मजदूरों के घायल होने की घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। मजदूर संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस हादसे के लिए खदान प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, धनपुरी थाना क्षेत्र स्थित बंगवार भूमिगत खदान में दूसरी पाली के दौरान मजदूर स्टॉपिंग वॉल निर्माण कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान खदान की छत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। मलबे की चपेट में आने से बल्लू कोल और गोलू बैगा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि प्रेम लाल विश्वकर्मा, राजकुमार यादव, अमित यादव और अंजनी बैगा घायल हो गए।
घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जिस क्षेत्र में कार्य कराया जा रहा था, वहां की भू-वैज्ञानिक और संरचनात्मक स्थिति का परीक्षण समय पर किया गया था या नहीं। श्रमिकों का कहना है कि भूमिगत खदानों में कार्य शुरू करने से पहले नियमित निरीक्षण, रूफ सपोर्ट और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है, लेकिन कई बार उत्पादन लक्ष्य के दबाव में सुरक्षा संबंधी पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि खदान की छत कमजोर थी तो उस क्षेत्र में मजदूरों को काम करने की अनुमति क्यों दी गई। मजदूर संगठनों का कहना है कि हादसे से पहले भी कई बार खदान के कुछ हिस्सों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई थीं, लेकिन उन पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यही कारण है कि आज दो परिवारों के घरों के चिराग बुझ गए।
हादसे के बाद खदान प्रबंधन, सुरक्षा अधिकारी और रेस्क्यू टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई हादसे के बाद की गई, जबकि आवश्यकता पहले से सुरक्षा सुनिश्चित करने की थी। मृतक मजदूरों के परिजनों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों ने भी कहा है कि केवल जांच समिति गठित कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी हुई है तो संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को रोजगार और घायलों के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत खदानों में सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। नियमित निरीक्षण, मजबूत रूफ सपोर्ट, वेंटिलेशन व्यवस्था और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान समय पर करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। यदि इनमें किसी स्तर पर कमी पाई जाती है तो वह सीधे तौर पर श्रमिकों के जीवन को खतरे में डालती है।
बंगवार खदान में हुई यह दुखद घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि खदानों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की जांच पर टिकी हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा होने की आशंका बनी रहेगी। दो मजदूरों की मौत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उत्पादन से पहले श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही किसी भी खदान प्रबंधन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

अजय पाल

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