मुरमी टोला, कनेरी रैयत और कछरा टोला के ग्रामीणों ने किया चक्काजाम; एसडीएम पहुंचे मौके पर, सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजे जाने की दी जानकारी; ग्रामीणों ने कहा—जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो फिर करेंगे आंदोलन
डिंडौरी/मेहंदवानी। आजादी के दशकों बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंचने से नाराज ग्रामीणों का सब्र बुधवार को जवाब दे गया। जनपद पंचायत मेहंदवानी अंतर्गत ग्राम पंचायत सारंगपुर क्षेत्र के मुरमी टोला, कनेरी रैयत और कछरा टोला के ग्रामीण पक्की सड़क की मांग को लेकर मेहंदवानी-शहपुरा मार्ग पर उतर आए और चक्काजाम कर दिया। आंदोलन में स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ महिलाएं, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। करीब छह घंटे तक चले आंदोलन के कारण मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा और दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से गांव तक पक्की सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। इस संबंध में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने कई बार समस्या रखी गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा। धरातल पर सड़क निर्माण शुरू नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने इस बार लिखित आश्वासन मिलने तक चक्काजाम समाप्त नहीं करने की बात कही।
खराब रास्ते से सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चे
ग्रामीणों के मुताबिक पक्की सड़क के अभाव में सामान्य दिनों में भी गांव से आने-जाने में परेशानी होती है, जबकि बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। कच्चे और खराब रास्ते से सबसे अधिक परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ती है। बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान खराब रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क केवल आवागमन की सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों की शिक्षा, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और गांव के विकास से सीधे जुड़ा मुद्दा है।
यही वजह रही कि बुधवार को हुए आंदोलन में ग्रामीणों के साथ बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी सड़क पर बैठे नजर आए। महिलाओं और बुजुर्गों ने भी चक्काजाम में शामिल होकर वर्षों पुरानी सड़क की समस्या के समाधान की मांग उठाई।
छह घंटे तक बाधित रहा मेहंदवानी-शहपुरा मार्ग
पक्की सड़क की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन करीब छह घंटे तक चला। चक्काजाम के चलते मेहंदवानी-शहपुरा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लगने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें पहले भी कई बार मौखिक आश्वासन दिए जा चुके हैं, इसलिए इस बार वे केवल आश्वासन पर आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं थे। उनकी मांग थी कि प्रशासन सड़क निर्माण को लेकर स्पष्ट स्थिति बताए और उन्हें लिखित रूप में भरोसा दिया जाए कि गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
मौके पर पहुंचे एसडीएम, ग्रामीणों से की बातचीत
चक्काजाम लंबा खिंचने के बाद शहपुरा एसडीएम फरहान इरफान जमादार मौके पर पहुंचे और आंदोलनरत ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने उनके सामने सड़क नहीं होने से हो रही परेशानियों को रखा और जल्द पक्की सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की।
बताया गया कि एसडीएम ने ग्रामीणों को जानकारी दी कि सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है और प्रक्रिया पूरी होने में कुछ समय लग सकता है। प्रशासन की ओर से समझाइश और सड़क निर्माण को लेकर मिले आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने करीब छह घंटे से जारी चक्काजाम समाप्त कर मार्ग को आवागमन के लिए खोल दिया।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम—जल्द सड़क नहीं बनी तो फिर होगा आंदोलन
चक्काजाम समाप्त करने के बावजूद ग्रामीणों ने साफ किया कि उनकी लड़ाई पक्की सड़क बनने तक जारी रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे समस्या झेल रहे हैं और अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि सड़क निर्माण की दिशा में जल्द ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
करीब छह घंटे चले आंदोलन ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सड़क सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि सड़क निर्माण के लिए भेजा गया प्रस्ताव कब स्वीकृत होता है और मुरमी टोला, कनेरी रैयत व कछरा टोला के लोगों को पक्की सड़क कब मिलती है।
डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया







