डिंडौरी मध्यप्रदेश

रिपोर्ट अखिलेश झारिया

शहपुरा (डिंडौरी)। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर में पंचायत कार्यालय समय पर नहीं खुलने और सचिव-सरपंच की कथित अनुपस्थिति को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन अधिकांश दिनों में निर्धारित समय पर बंद रहता है, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ लेने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई ग्रामीण तो बिना काम कराए ही मायूस होकर वापस लौटने को मजबूर हैं।

 

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत कार्यालय में नियमित रूप से ताला लटका रहने के कारण जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, पेंशन संबंधी कार्य, मनरेगा भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य पंचायत स्तरीय सेवाओं का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की आजीविका और दैनिक जरूरतों पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि उन्हें एक छोटे से काम के लिए कई-कई बार पंचायत के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि जब प्रभारी सचिव से संपर्क किया जाता है तो वे किसी दूसरी पंचायत में होने की बात कहते हैं, लेकिन वहां जानकारी लेने पर भी उनकी मौजूदगी नहीं मिलती। वहीं सरपंच के भी अधिकांश समय पंचायत कार्यालय में अनुपस्थित रहने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसे में ग्रामीणों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

ग्रामीणों ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को सुबह 11:10 बजे पंचायत भवन के मुख्य द्वार और कार्यालय कक्षों पर ताला लटका हुआ देखा गया। उस समय ली गई तस्वीरों में पंचायत कार्यालय पूरी तरह बंद दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी एक दिन की स्थिति नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था है।

 

ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत कार्यालय को निर्धारित समय पर नियमित रूप से खोला जाए तथा सचिव और सरपंच की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को सरकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।

 

ग्रामीणों का सवाल, जिम्मेदारों से जवाब कब?

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनपद पंचायत शहपुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ग्राम पंचायत कंचनपुर की इस अव्यवस्था का संज्ञान कब लेंगे? क्या पंचायत कार्यालय में नियमित व्यवस्था बहाल कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, या फिर ग्रामीणों को इसी तरह ताले लगे कार्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है।

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