डिंडौरी मध्यप्रदेश

रिपोर्ट अखिलेश झारिया

 

 

पेंड्रारोड-अमरकंटक-डिंडौरी-मंडला-घंसौर-लखनादौन-गोटेगांव नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे की शीघ्र स्वीकृति की मांग

 

डिंडौरी/भोपाल।  मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रस्तावित नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर को लेकर एक बार फिर पहल तेज हुई है। डिंडौरी विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री  ओमकार सिंह मरकाम  ने केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव  को पत्र लिखकर पेंड्रारोड-अमरकंटक-डिंडौरी-मंडला-घंसौर-लखनादौन-गोटेगांव (श्रीधाम) तक प्रस्तावित नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS)  को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की मांग की है।

विधायक मरकाम ने 22 सितंबर को रेल मंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि यह बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। प्रस्तावित रेल मार्ग से अमरकंटक, डिंडौरी, मंडला, घंसौर, लखनादौन और गोटेगांव जैसे क्षेत्रों को रेल संपर्क मिलने के साथ सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

 

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से मिल चुका सकारात्मक संकेत

 

पत्र में विधायक मरकाम ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के 9 जुलाई 2026 के पत्र  का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार रेलवे ने इस प्रस्ताव को उपयोगी एवं महत्वपूर्ण मानते हुए आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित परिचालन विभाग को अग्रसारित किए जाने की जानकारी दी है। इसी आधार पर विधायक ने रेल मंत्रालय से फाइनल लोकेशन सर्वे को स्वीकृति देकर परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

 

नितिन सोलंकी के प्रयासों के बाद विधायक ने उठाया मुद्दा

 

इस प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को लेकर रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी लंबे समय से प्रयासरत बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार सोलंकी ने इस रेल मार्ग की आवश्यकता और इससे क्षेत्र को होने वाले संभावित लाभों को लेकर विधायक ओमकार सिंह मरकाम से चर्चा की थी। इसके बाद विधायक ने मामले को रेल मंत्रालय के समक्ष उठाते हुए केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र भेजा।

 

दो राज्यों के आदिवासी अंचलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल मार्ग

 

प्रस्तावित रेल लाइन पेंड्रारोड से अमरकंटक होते हुए डिंडौरी, मंडला, घंसौर, लखनादौन और गोटेगांव (श्रीधाम) तक प्रस्तावित है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो इससे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच रेल संपर्क का एक नया मार्ग विकसित हो सकता है। विशेष रूप से वर्तमान में सीधे रेल संपर्क से वंचित डिंडौरी और आसपास के आदिवासी अंचलों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

अमरकंटक सहित नर्मदा-विंध्य क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने की संभावना भी इस परियोजना से जुड़ी है। वहीं स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापारिक केंद्रों तक आवागमन आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

अब फाइनल लोकेशन सर्वे की स्वीकृति पर नजर

 

विधायक मरकाम ने रेल मंत्री से परियोजना के  फाइनल लोकेशन सर्वे की शीघ्र स्वीकृति  देने और आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार के सकारात्मक हस्तक्षेप से आदिवासी अंचल के लाखों नागरिकों की वर्षों पुरानी रेल संपर्क की आकांक्षा को नई दिशा मिल सकेगी।

 

फिलहाल इस पहल के बाद क्षेत्रवासियों की नजर रेल मंत्रालय के अगले निर्णय पर टिकी है। फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी मिलती है तो प्रस्तावित नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर को आगे बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होगी।

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