शहडोल मध्य प्रदेश 

 

नए शराब ठेके के साथ ही ‘लूट’ का खेल शुरू

 

 आबकारी विभाग की चुप्पी पर सवाल

 

​शहडोल। जिले में 31 मार्च के बाद आबकारी सत्र बदलते ही शराब दुकानों की कमान ‘मीरा लक्ष्मी एग्रो स्टेट अंबिकापुर’ के हाथों में क्या आई, मानों नियमों को ताक पर रखने का खुला लाइसेंस मिल गया। नई ठेका कंपनी ने जिम्मेदारी संभालते ही दूसरे ही दिन से अपनी मनमानी शुरू कर दी है, जहाँ मदिरा प्रेमियों की जेब पर सरेआम डाका डाला जा रहा है।

​न रेट लिस्ट, न रसीद: सिर्फ ‘अवैध’ वसूली

​शहडोल के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित इन शराब दुकानों पर सरकारी कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक, हर दुकान के सामने स्पष्ट रूप से रेट लिस्ट चस्पा होना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ नजारा बिल्कुल उल्टा है। रेट लिस्ट के अभाव में सेल्समैन ग्राहकों से मनमाना दाम वसूल रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब प्रिंट रेट से अधिक पैसे लेने के बावजूद ग्राहकों को कैश मेमो (रसीद) देने से साफ मना कर दिया जाता है।

​सड़क किनारे ‘लूट’ की दुकान

​आमजन का आरोप है कि यह ठेका कम और सड़क किनारे खुली ‘लूट की दुकान’ ज्यादा नजर आ रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि शराब की बोतलों पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से 10 से 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। विरोध करने पर सेल्समैन अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदार को न तो कानून का भय है और न ही प्रशासन का।

 

​आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध?

 

​इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल जिले के आबकारी विभाग पर खड़ा होता है। क्या विभाग के अधिकारियों को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है? या फिर ‘सांठ-गांठ’ के चलते जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? नए ठेकेदार द्वारा पहले ही दिन से शुरू की गई इस धांधली ने विभागीय कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

 

     अजय पाल

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