शहडोल मध्य प्रदेश 

शहडोल। जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत पतेरिया टोला के मैर टोला स्थित विद्यालय में बन रही बाउंड्री वॉल इन दिनों भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बनती जा रही है। करीब 12 लाख रुपए की लागत से तैयार की जा रही इस बाउंड्री वॉल में गुणवत्ता विहीन सामग्री के उपयोग के आरोप सामने आए हैं, जिससे जनपद निधि के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य में न तो मानक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और न ही तकनीकी नियमों का पालन हो रहा है। दीवार की मजबूती और टिकाऊपन पर भी सवाल उठने लगे हैं। निर्माण स्थल की स्थिति देखकर ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्य में किस स्तर की अनियमितता बरती जा रही है।

 

बिना एस्टीमेट के हो रहा निर्माण कार्य

 

जानकारी के मुताबिक, जनपद पंचायत जयसिंहनगर में किसी भी निर्माण कार्य के लिए पूर्व में एस्टीमेट तैयार किया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का एस्टीमेट उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

उपयंत्री मनोज शुक्ला पर आरोप है कि वे बिना स्वीकृत एस्टीमेट के ही निर्माण कार्यों को अंजाम देने में माहिर हैं। कार्यस्थल पर एस्टीमेट का न होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं जानकारी को छिपाने और पारदर्शिता से बचने की कोशिश की जा रही है। यदि एस्टीमेट सार्वजनिक हो, तो लागत और गुणवत्ता की तुलना करना आसान हो जाता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया।

उपयंत्री और सचिव की मिलीभगत के आरोप

इस पूरे मामले में उपयंत्री मनोज शुक्ला और संबंधित पंचायत सचिव की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि दोनों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र में हुए कई निर्माण कार्यों में इसी तरह की अनियमितताएं देखने को मिली हैं। यदि इन सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी उजागर हो सकती है।

इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे यह संदेह और गहरा जाता है कि कहीं उच्च स्तर पर भी इस पूरे मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है।

 

जिला स्तर के अधिकारी भी बने मूकदर्शक

 

जनपद पंचायत स्तर पर हो रही अनियमितताओं के बावजूद जिला पंचायत शहडोल के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्र में लगातार घटिया निर्माण कार्यों की खबरें सामने आने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

पतेरिया टोला, अमझोर और पहड़िया जैसे क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की गई है। ऐसे में आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे।

 

एसडीओ की भूमिका पर भी उठे सवाल

 

जनपद पंचायत जयसिंहनगर के एसडीओ की कार्यशैली भी इस मामले में संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि एसडीओ क्षेत्र में नियमित भ्रमण तो करते हैं, लेकिन इसके बावजूद घटिया निर्माण कार्यों पर रोक नहीं लग पा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसडीओ को इस मामले की जानकारी मौखिक रूप से दी गई, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब अधिकारी मौके पर मौजूद रहते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो फिर उनके निरीक्षण का औचित्य क्या है।

कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि उपयंत्री और एसडीओ की मिलीभगत से ही यह पूरा खेल संचालित हो रहा है, जिससे शासन की राशि का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।

 

कब होगी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई?

 

इस पूरे मामले ने जनपद निधि के उपयोग और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। जिस राशि का उपयोग जनहित के कार्यों में होना चाहिए, वह यदि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी धोखा है।

अब जरूरत है कि जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में संज्ञान लें और निष्पक्ष जांच कराएं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई ही इस तरह के मामलों पर अंकुश लगा सकती है। अन्यथा जनपद पंचायत जयसिंहनगर में भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा और शासकीय राशि का दुरुपयोग होता रहेगा।

   रिपोर्ट-  अजय पाल

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