जब कलेक्टर साहब’ बने शिक्षक: उरपुटी आंगनबाड़ी में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा का अनूठा अंदाज
धमतरी: जिले के डुबान क्षेत्र में स्थित ग्राम उरपुटी की आंगनबाड़ी में उस वक्त रौनक और बढ़ गई, जब धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण पर पहुंचे। आमतौर पर प्रशासनिक दौरों में फाइलों और आंकड़ों का जोर होता है, लेकिन यहाँ कलेक्टर का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय रूप देखने को मिला।
राजगीत से स्वागत, फिर शुरू हुई ‘पाठशाला’
जैसे ही कलेक्टर केंद्र पहुंचे, नन्हे-मुन्नों ने अपनी सुरीली आवाज में छत्तीसगढ़ के गौरव ‘आरपा पैरी के धार’ का गायन कर उनका आत्मीय स्वागत किया। बच्चों के इस उत्साह ने निरीक्षण के माहौल को एक अनौपचारिक क्लासरूम में बदल दिया।
कलेक्टर मिश्रा ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल को किनारे रख, स्वयं शिक्षक की कुर्सी संभाली। उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर उनसे संवाद किया और खेल-खेल में फलों, रंगों और जानवरों के नाम पूछे। बच्चों के आत्मविश्वास और सटीक जवाबों ने कलेक्टर को भी प्रभावित किया।
व्यवस्थाओं की बारीकी से परख
सिखाने के साथ-साथ कलेक्टर ने अपने दायित्वों का निर्वहन भी पूरी मुस्तैदी से किया। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया:
पोषण और आहार: बच्चों को मिलने वाले पूरक पोषण आहार और नाश्ते की गुणवत्ता जांची।
शिक्षा पद्धति: आंगनबाड़ी में संचालित खेल आधारित शिक्षण गतिविधियों (Activity-based learning) का अवलोकन किया।
स्वच्छता एवं रिकॉर्ड: केंद्र की साफ-सफाई, स्वच्छता व्यवस्था और दस्तावेजों के संधारण को परखा।
“बच्चों के बीच पहुंचकर न केवल व्यवस्था की हकीकत पता चलती है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए प्रोत्साहित करना भी हमारी जिम्मेदारी है।” — एक प्रशासनिक सूत्र के अनुसार
कलेक्टर के कार्य पर एक दृष्टि (विश्लेषण)
अबिनाश मिश्रा का यह दौरा केवल एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि इसके गहरे प्रशासनिक और सामाजिक मायने हैं:
संवेदनशीलता और जुड़ाव: एक उच्च पदस्थ अधिकारी का बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर बात करना प्रशासन और आम जनता के बीच की दूरी को कम करता है।
जमीनी स्तर पर निगरानी: औचक निरीक्षण से जमीनी स्तर के कर्मचारियों में सक्रियता बढ़ती है और व्यवस्थाओं में सुधार आता है।
शिक्षा और पोषण पर जोर: उरपुटी जैसे डुबान प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और पोषण की समीक्षा करना यह दर्शाता है कि प्रशासन सुदूर अंचलों के विकास को लेकर गंभीर है।
प्रेरणादायी नेतृत्व: कलेक्टर का ‘शिक्षक’ बनना यह संदेश देता है कि शिक्षा ही समाज की नींव है और अधिकारियों को केवल डेस्क तक सीमित न रहकर फील्ड में सक्रिय रहना चाहिए।
निष्कर्ष: धमतरी कलेक्टर के इस प्रयास ने न केवल आंगनबाड़ी की व्यवस्थाओं को सुधारा, बल्कि उन नन्हे बच्चों के मन में शिक्षा के प्रति एक नई अलख भी जगाई है। उरपुटी की आंगनबाड़ी में बिताया गया वह समय अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
रिपोर्ट: मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ,पुलिसवाला न्यूज़
