डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिंडौरी/अमरपुर। अंतर्राष्ट्रीय श्री अन्न दिवस के अवसर पर क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र डिंडौरी और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के तत्वावधान में सांदीपनी विद्यालय अमरपुर में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को श्री अन्न के पोषक महत्व, स्वास्थ्य लाभ तथा बदलते जलवायु परिवेश में इसकी खेती की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र डिंडौरी की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मनीषा श्याम ने कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा सहित विभिन्न मोटे अनाजों की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि श्री अन्न पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। कम पानी और विपरीत मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है, इसलिए जलवायु परिवर्तन के दौर में इसका महत्व लगातार बढ़ रहा है।
कुपोषण से लड़ने में उपयोगी है श्री अन्न
डॉ. मनीषा श्याम ने कहा कि डिंडौरी जिले के पारंपरिक भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे श्री अन्न में कुपोषण से निपटने की क्षमता है। कभी स्थानीय और ग्रामीण भोजन के रूप में पहचाने जाने वाले मिलेट्स अब अपने पोषक गुणों के कारण वैश्विक स्तर पर ‘सुपरफूड’ के रूप में पहचान बना रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से श्री अन्न को नियमित भोजन में शामिल करने और इसके महत्व की जानकारी परिवार एवं समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
प्रदर्शनी में दी गई मिलेट्स की प्रत्यक्ष जानकारी
कार्यशाला के दौरान विभिन्न प्रकार के श्री अन्न की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को मिलेट्स की अलग-अलग प्रजातियों, उनके बीजों तथा उनसे तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की प्रत्यक्ष जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और वैज्ञानिकों से श्री अन्न से जुड़े प्रश्न पूछे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सांदीपनी विद्यालय के प्राचार्य प्रदीप कुमार सुरीन ने की। इस अवसर पर व्यावसायिक शिक्षक कृषि अशोक कुमार यादव, विद्यालय के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार ने क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र की टीम का आभार व्यक्त किया।
