मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग में ‘रिफॉर्म अवतार’ –
अब 1 अप्रैल से ही शुरू होगा नया सत्र – किताबें और साइकिलें भी पहले दिन ही तैयार
माननीय मुख्यमंत्री के विज़न और डॉ. संजय गोयल की कार्यकुशलता से बदला प्रदेश का शैक्षिक परिदृश्य; जो पहले नामुमकिन था, उसे कर दिखाया मुमकिन
भोपाल। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में इन दिनों एक अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जिस विभाग में पहले किताबों और साइकिलों के वितरण में महीनों की देरी सामान्य बात मानी जाती थी, वहाँ अब सचिव डॉ. संजय गोयल के नेतृत्व में एक नई कार्य-संस्कृति का जन्म हुआ है। माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन और स्कूल शिक्षा मंत्री जी के सीधे निर्देशों का पालन करते हुए, डॉ. गोयल ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1 अप्रैल से ही बच्चों की पढ़ाई का उत्सव शुरू हो जाए।
समय पर सत्र और 100% किताबों की प्राप्ति
पिछले वर्ष से शुरू हुई इस नई परंपरा के तहत, अब 1 अप्रैल से ही बच्चों के एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि सत्र के पहले ही दिन बच्चों के हाथों में उनकी नई और पूरी किताबें पहुँच गईं। डॉ. संजय गोयल ने ‘टेक्स्टबुक कॉर्पोरेशन’ के माध्यम से ऐसी सटीक रणनीति बनाई कि दूर-दराज के गाँवों तक भी किताबों की कमी नहीं रही। यह पहली बार है जब प्रदेश का कोई बच्चा किताबों के इंतज़ार में खाली हाथ नहीं बैठा।
साइकिल वितरण: एक ऐतिहासिक कदम
इस वर्ष की सबसे बड़ी और सुखद खबर यह है कि डॉ. संजय गोयल ने माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर एक और असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है। अब 1 अप्रैल से ही बच्चों को निशुल्क साइकिलें भी मिलने लगेंगी। पहले साइकिलों के लिए बच्चों को महीनों इंतज़ार करना पड़ता था, लेकिन इस बार सत्र की शुरुआत के साथ ही साइकिलें भी तैयार हैं। यह कदम न केवल बच्चों का उत्साह बढ़ाएगा, बल्कि स्कूल छोड़ने वाले (Drop-out) बच्चों की संख्या में भी भारी कमी लाएगा।
रणनीति और ‘जीरो टॉलरेंस’ का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश के इतिहास में शिक्षा विभाग ने इतनी गति पहले कभी नहीं देखी थी। डॉ. संजय गोयल की कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सटीक मॉनिटरिंग और ईमानदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर वितरण तक कहीं भी भ्रष्टाचार या देरी की गुंजाइश न रहे। सप्लायर्स और वेंडर्स पर कड़ा नियंत्रण रखते हुए उन्होंने गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया।
हर तरफ हो रही सराहना
मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में डॉ. गोयल द्वारा उठाए गए इन कदमों की सराहना न केवल विभाग के भीतर, बल्कि अभिभावकों और आम जनता के बीच भी हो रही है। लोग इस बात से चकित हैं कि जो काम पहले कभी सोचे भी नहीं गए थे, वे अब धरातल पर उतर रहे हैं। मध्य प्रदेश का शिक्षा विभाग अब देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ संसाधनों की उपलब्धता अब ‘फाइलों’ में सीमित नहीं, बल्कि संसाधन सीधे बच्चों के ‘हाथों’ में समय पर पहुँच रहे है।
रिपोर्ट – पुलिसवाला ब्यूरो
