रायपुर | 29 मार्च, 2026
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा नशीले पदार्थों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही को अधिक प्रभावी और त्रुटिहीन बनाने के उद्देश्य से आज सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। NDPS एक्ट (स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम) के प्रकरणों की विवेचना को सुदृढ़ बनाने हेतु आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र में रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण जिले के लगभग 125 विवेचकों एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
न्यायपालिका और पुलिस समन्वय के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यशाला का भव्य उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा और पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला की गरिमामय उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर न्यायिक जगत से माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पंकज सिन्हा, माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शैलेश शर्मा तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आनंद सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पुलिस विभाग की ओर से अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर श्री अमित तुकाराम कांबले, पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) श्री मयंक गुर्जर एवं पुलिस उपायुक्त (पश्चिम जोन) श्री संदीप पटेल सहित अन्य राजपत्रित अधिकारी और थाना प्रभारी भी सम्मिलित हुए।
विवेचना ही न्याय की आधारशिला: पुलिस कमिश्नर
सत्र को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने युवाओं में बढ़ते नशे के रुझान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे एक घातक सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों की भूमिका केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना और मजबूत साक्ष्य संकलन के माध्यम से अपराधियों को सजा दिलाना (दोषसिद्धि) प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से विवेचना की प्रक्रियात्मक त्रुटियों में कमी आएगी और नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी।
थानों की भूमिका ‘प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र’ जैसी: जिला न्यायाधीश
माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में थानों की तुलना “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र” से की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बीमारी का इलाज अस्पताल से शुरू होता है, उसी प्रकार अपराध का न्यायोचित उपचार प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के साथ ही प्रारंभ हो जाता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष, संवेदनशील और भेदभाव रहित कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया, ताकि समाज में न्याय की स्थापना सुनिश्चित हो सके।
विषय विशेषज्ञों ने दी बारीकियों की जानकारी
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में न्यायिक विशेषज्ञों ने अधिकारियों को कानूनी दांव-पेंच सिखाए। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शैलेश शर्मा ने NDPS अधिनियम के प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विवेचना के दौरान अक्सर होने वाली सामान्य गलतियों को रेखांकित करते हुए उनके सुधार के उपाय बताए।
वहीं, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पंकज सिन्हा ने विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों (Case Laws) और उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित विवेचना से दोषसिद्धि की संभावना को अधिकतम किया जा सकता है। कार्यशाला के अंतिम चरण में एक प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ, जहाँ विवेचकों ने अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया और विशेषज्ञों से उनका निराकरण प्राप्त किया।
रिपोर्ट,मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ,पुलिसवाला न्यूज़
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