सतना मध्य प्रदेश
श्रीराम जन्म और बाल लीला की प्रस्तुति ने मोहा मन, थाईलैंड के कलाकारों से शुभारंभ
सतना 13 अक्टूबर 2026/मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा मंगलवार की संध्या पर चित्रकूट के राघव प्रयाग घाट पर सतना सांसद श्री गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक श्री सुरेंद्र सिंह गहरवार, संतोषी अखाड़ा के श्री महंत रामजी दास जी महाराज, श्री कामदगिरी प्रमुख द्वार के महंत श्री मदन दास जी महाराज, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव श्री अभय महाजन, नगर पंचायत चित्रकूट की अध्यक्ष सुश्री साधना पटेल, तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजूषा जौहरी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया। राघव प्रयाग घाट पर 19 अक्टूबर तक चलने वाले सात दिवसीय आयोजन में भारत सहित विदेशों की रामलीला और पारंपरिक कला शैलियों के जरिए प्रभु श्रीराम के जीवन-चरित्र, आदर्शों और रामकथा की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का मंचन किया जाएगा।
पहले दिन थाईलैंड का ‘श्री रामाकेन दल’ यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल खोन नृत्य शैली के माध्यम से श्रीराम जन्म और बाल लीला की प्रस्तुति हुई। जिसमें श्रीराम जन्म, विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार के प्रसंगों का मंचन किया गया। थाईलैंड की पारंपरिक खोन नृत्य शैली इस प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण का केंद्र रही। थाईलैंड की रामायण ‘रामाकियन’ और भारतीय रामकथा के प्रसंग अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के मंच पर एक साथ नजर आए। थाईलैंड के कलाकारों ने पारंपरिक खोन नृत्य-नाटिका के माध्यम से स्वर्ण मृग प्रसंग, सीता हरण और भगवान श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन किया। संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश की पहल पर आयोजित इस उत्सव में विदेशी रामायण परंपराओं को शामिल करने का उद्देश्य दर्शकों को रामकथा के वैश्विक स्वरूप से परिचित कराना है। उतने ही आतुर दिखे दर्शक जिन्हें यह जानने की विशेष जिज्ञासा रही कि आखिर प्रभु श्री राम को थाईलैंड में किस रूप में जाना जाता है।
रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत करेंगे
उत्सव में रूस के मास्को से आए ‘दिशा रामलीला’ दल के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कलाकार भी अपनी पारंपरिक मंचन शैलियों में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत करेंगे। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास और वीर भारत न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन की देखरेख में किया जा रहा है।
एक मंच पर अलग-अलग देशों की रामकथा परंपराएं
रूस के मास्को का ‘दिशा रामलीला’ दल रावण वध और श्रीरामराज्य जैसे प्रसंग प्रस्तुत करेगा। आंध्र प्रदेश के कलाकार यक्षगान शैली में सीता स्वयंवर और तेलंगाना के कलाकार चंडू भागवतम् शैली में सीता हरण का मंचन करेंगे।
थाई रामकथा से परिचित होंगे दर्शक
थाईलैंड में प्रचलित रामकथा परंपरा में भगवान श्रीराम के चरित्र की विशिष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखने को मिलेगी। कलाकारों की प्रस्तुतियों के भाव और प्रसंग दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अनुवादक की व्यवस्था रहेगी।
सात दिन तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
13 अक्टूबर शुरू होकर 19 अक्टूबर तक राघव प्रयाग घाट पर प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से कार्यक्रम होंगे। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली का आयोजन में विशेष सहयोग रहेगा।
प्रशांत त्रिपाठी सतना ब्यूरो







