गरियाबंद। छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला बने लगभग 14 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन जिला मुख्यालय की तस्वीर आज भी विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर हल्की से मध्यम बारिश के बाद सड़क का जलमग्न हो जाना प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त मार्ग पर घंटों तक पानी भरा रहने से राहगीरों, वाहन चालकों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन पानी में डगमगाते नजर आए, चारपहिया वाहन भी रेंगते हुए निकलने को मजबूर रहे। यह दृश्य बताता है कि नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की जल निकासी व्यवस्था कितनी लचर है।
विडंबना यह है कि हर वर्ष बारिश से पहले नालों की सफाई, जलभराव रोकने और शहर को व्यवस्थित करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली बारिश में ही सारी तैयारियों की हकीकत सामने आ जाती है। करोड़ों रुपये विकास कार्यों पर खर्च होने के बावजूद जिला मुख्यालय की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राष्ट्रीय राजमार्ग की यह स्थिति है, तो शहर की अंदरूनी सड़कों और मोहल्लों का हाल कैसा होगा? आखिर जनता कब तक इस बदहाल व्यवस्था का खामियाजा भुगतती रहेगी?
अब समय आ गया है कि नगर पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन केवल कागजी दावों तक सीमित न रहें, बल्कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण और जवाबदेही सुनिश्चित करें। अन्यथा विकास के दावे केवल होर्डिंग और भाषणों तक ही सिमटकर रह जाएंगे।
जनता का सवाल:
“जब जिला मुख्यालय का यह हाल है, तो विकास आखिर किसे कहते हैं? 14 वर्षों बाद भी गरियाबंद को बुनियादी
सुविधाएं कब मिलेंगी?”
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद






