मनोज पांडेय
प्रयागराज। हिंदी विश्व की भाषा बनकर रहेगी।हिंदी में वह क्षमता है कि वह सभी भाषाओं को समायोजित करके चलती है। उक्त उद्गार विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित वैश्विक हिंदी महासभा एवं अखिल भारतीय हिंदी परिषद, काशी प्रांत के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा से पधारे स्वामी दयानंद ने व्यक्त किए। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में साहित्यकार डॉ० विजयानन्द ने कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा और विश्वभाषा बनने की ओर तेजी से बढ़ रही है। कभी भी सरकार संसद में इस तरह का प्रस्ताव पारित कर सकती है। विशेष अतिथि वाराणसी से आए आचार्य हरीप्रसाद अधिकारी और राजस्थान से आए डॉक्टर आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने हिंदी की सामर्थ्य को परिभाषित किया। कार्यक्रम में आचार्य जनार्दन प्रसाद मणि, अभय नारायण तिवारी, राजेश पांडे, गंगा प्रसाद त्रिपाठी, पुष्कर प्रधान, अमित शर्मा, श्रीराम त्रिपाठी, गौरव मिश्र आदि ने भी अपने विचार रखे और हिंदी विषय पर काव्यपाठ किया। इस अवसर पर विशेष अतिथियों को सम्मानित किया गया तथा वैश्विक हिंदी काव्य संग्रह का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन आचार्य डॉ० सियाराम त्रिपाठी ने किया।

