​शहडोल। जनपद पंचायत सोहागपुर के सभागार में सोमवार को आयोजित जिला स्तरीय ‘पंच सम्मेलन’ में अव्यवस्था और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए जिले भर से आए त्रिस्तरीय पंचायतीराज प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। बैठक व्यवस्था के अभाव और प्रोटोकॉल के उल्लंघन से आहत पंच, सरपंच व जनपद सदस्य सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए धरने पर बैठ गए। अंततः जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल की संवेदनशीलता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद जनप्रतिनिधियों का आक्रोश शांत हुआ।

​उपेक्षा से भड़का जनप्रतिनिधियों का गुस्सा

‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (VB-GRAM G)’ के तहत आयोजित इस सम्मेलन में जिलेभर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। प्रतिनिधियों का आरोप है कि सभागार में न तो उनके पद के अनुरूप उचित बैठक व्यवस्था थी और न ही मान-सम्मान का ध्यान रखा गया। इस उपेक्षा से क्षुब्ध होकर सभी प्रतिनिधि एकजुट होकर सम्मेलन छोड़कर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए।

​कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े, परिसर में दिया धरना

कलेक्ट्रेट पहुंचे जनप्रतिनिधियों को समझाने के लिए अपर कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर पहुंचे, किंतु जनप्रतिनिधि केवल कलेक्टर से ही सीधे संवाद करने की जिद पर अड़ गए और परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का यह अपमान असहनीय है और जिम्मेदारअधिकारियों-कर्मचारियों पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

 

 

​कलेक्टर की संवेदनशीलता: काम छोड़कर पहुंचे, सुनी पीड़ा

मामले की गंभीरता को भांपते हुए जिले के संवेदनशील कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने अपनी व्यस्त दिनचर्या और महत्वपूर्ण कार्य को बीच में छोड़कर सीधे धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की। कलेक्टर ने सभी की बातों को धैर्यपूर्वक सुना और व्यवस्था में हुई लापरवाही पर खेद जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल व मान-सम्मान की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार संबंधित दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध जांच कर सख्त कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया।

​आश्वासन के बाद धरना समाप्त

कलेक्टर पार्थ जायसवाल के सकारात्मक रुख और त्वरित कार्रवाई के वादे से संतुष्ट होकर सभी जनप्रतिनिधियों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त किया और धरना स्थल से वापस लौट गए।

अजय पाल

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