सिवनी………….                                      सोशल मीडिया पर भावुक हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजकुमार “पप्पू” खुराना               नीट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने पर सुनाई अपने संघर्ष के समय की वास्तविक घटना.”आज जब नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लगातार लीक होने की घटनाओं से लाखों परीक्षार्थी और उनके अभिभावक चिंता और निराशा का सामना कर रहे हैं, तब मुझे 26 दिसंबर 1985 की एक सच्ची घटना याद आ जाती है। इस घटना ने मुझे सिखाया कि अपने बच्चों की शिक्षा के लिए एक अभिभावक अपनी जान तक जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटता।WhatsApp Image 2026 06 29 at 02.08.42 1

 

वर्ष 1985 में सिवनी जिले के केवलारी क्षेत्र में नहर निर्माण कार्य का ठेका मेरे पास था। निर्माण कार्य के दौरान अचानक सूचना मिली कि मिट्टी की खुदाई करते समय मिट्टी धंसने से एक मजदूर उसके नीचे दब गया है और गंभीर रूप से घायल हो गया है। मैं तुरंत घटनास्थल पर पहुँचा और उसे लेकर केवलारी अस्पताल गया। वहाँ के डॉक्टर ने उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए तत्काल उसे जिला अस्पताल, सिवनी ले जाने की सलाह दी।

 

मैं तुरंत उसे सिवनी जिला अस्पताल लेकर पहुँचा। वहाँ किसी से परिचय न होने के कारण मरीज को भर्ती कराने के बाद स्थानीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से सहायता लेने पहुँचा। उसी समय पता चला कि कांग्रेस के वरिष्ठ साथी स्वर्गीय मूलचंद दुबे जी एवँ स्व. श्री यदुनाथ ब्यौहार जी कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने के लिए बस से बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) रवाना होने वाले थे।

 

मैंने उनसे पूरी घटना बताई। उन्होंने तुरंत बस रुकवाई और मेरे साथ जिला अस्पताल पहुँचे। वहाँ उन्होंने डॉ. एस. सी. जैन और डॉ. एम. एन. त्रिवेदी से चर्चा कर घायल मजदूर के तत्काल उपचार की व्यवस्था कराई।

 

अगले दिन ऑपरेशन के बाद जब मैं उस मजदूर से मिलने गया, तो उसने जो बात बताई, उसने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। उसने कहा—

 

“साहब, मैंने इससे पहले कभी नहर में मिट्टी खोदने का काम नहीं किया था। मेरे बच्चों की स्कूल फीस जमा करनी थी, इसलिए मजबूरी में पहली बार यह काम करने आया था।”

 

उस समय मजदूरी भी लगभग ₹3.50 से ₹4.00 प्रतिदिन हुआ करती थी। अनुभव न होने के कारण वह ऊपर खड़े होकर सब्बल से मिट्टी खोद रहा था। अचानक मिट्टी धंस गई और वह भी उसके साथ नीचे जा गिरा।

 

उसकी यह बात सुनकर मेरी आँखें नम हो गईं। मैंने उसी दिन उसके बच्चों के स्कूल जाकर उनकी फीस जमा कराई और जब तक वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो गया, तब तक उसकी हर संभव आर्थिक और मानवीय सहायता करता रहा।

 

आज जब प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएँ ईमानदारी से पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सपनों पर चोट करती हैं, तब उस मजदूर का चेहरा याद आ जाता है। जिस पिता ने अपने बच्चों की फीस भरने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी, उसके जैसे लाखों माता-पिता आज भी अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में होने वाली अनियमितताएँ केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि उन परिवारों के त्याग, संघर्ष और विश्वास का भी अपमान हैं।-राजकुमार खुराना. वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी सिवनी.                                                  रिपोर्ट -आकाश भार्गव

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