डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

शहपुरा। शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहपुरा के प्राचार्य डी.के. श्रीवास्तव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के बदले धुंधले, अपठनीय और बिना प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराने को लेकर उन पर शासकीय खर्चों में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार को छिपाने के आरोप लगे हैं।

नगर के वार्ड क्रमांक 01 निवासी मनीष साहू ने विद्यालय में विभिन्न शासकीय मदों से किए गए खर्चों की जानकारी प्राप्त करने के लिए 24 जनवरी 2025 को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद आवेदक को प्रथम एवं द्वितीय अपील का सहारा लेना पड़ा। मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा, जहां आयोग ने विद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट एवं संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

आवेदक मनीष साहू का आरोप है कि आयोग के निर्देशों के बावजूद विद्यालय प्राचार्य द्वारा जो दस्तावेज भेजे गए, वे पूरी तरह धुंधले, काले रंग के और पढ़ने योग्य नहीं हैं। साथ ही दस्तावेजों पर किसी प्रकार का प्रमाणीकरण भी नहीं किया गया। ऐसे में उपलब्ध कराई गई जानकारी की सत्यता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मनीष साहू ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को शिकायत सौंपते हुए स्पष्ट, पठनीय और प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि नियमानुसार जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो वे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य एवं विभागीय अधिकारियों की होगी।

मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि विद्यालय में विभिन्न शासकीय योजनाओं और मदों से खर्च की गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया, जिसे सार्वजनिक करने में इतनी अनिच्छा दिखाई जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय वरिष्ठ अधिकारी मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सूचना के अधिकार अधिनियम के पालन को सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं।

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