उमरिया।-मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली का एक रूह कंपा देने वाला मंजर उमरिया जिले के घुनघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र में सामने आया है। जहां सुरक्षित मातृत्व के सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाते हुए एक प्रसूता की डिलीवरी टपकती छत, अंधेरे और पानी से लबालब भरे फर्श पर बोरी बिछाकर कराई गई।
रातभर पानी में तड़प, सुबह कोने में बिछी बोरी
पाली विकासखंड के ग्राम तुमी निवासी प्रसूता द्रोपती यादव को 27 अगस्त की रात करीब 11 बजे गंभीर प्रसव पीड़ा के चलते केंद्र लाया गया था। अस्पताल पहुंचते ही परिजनों के होश उड़ गए—भवन की छत से पानी की धार बह रही थी, कमरों में घुटने तक सीलन व जलभराव था और बिजली नदारद थी। रातभर असहनीय दर्द और सीलन भरे पानी के बीच जिंदगी-मौत से जूझने के बाद, सुबह कर्मचारियों ने मजबूरी में कमरे के एक सूखे कोने में बोरी बिछाकर उसका प्रसव कराया।
जच्चा–बच्चा दोनों की जान पर था भारी जोखिम
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती थी। ऐसे दूषित और भीगे माहौल में प्रसव से:
प्रसूता को: प्यूपरल सेप्सिस (घातक संक्रमण), यूट्रस इन्फेक्शन और टिटनेस का सीधा खतरा।
नवजात को: हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान गिरना), निमोनिया और गर्भनाल संक्रमण का खतरा।
इमरजेंसी का जोखिम: बिजली न होने से अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) जैसी आपात स्थिति में प्रसूता की जान बचाना असंभव हो जाता।
भवन बना ‘भूतहा खंडहर‘, 20 पंचायतों की अनदेखी
यह केंद्र घुनघुटी और तुमी समेत करीब 15 से 20 ग्राम पंचायतों के लिए एकमात्र लाइफलाइन है, जहां रोजाना 4 से 5 प्रसव होते हैं। मौके पर भवन की हालत भयावह है—छज्जों का प्लास्टर भरभरा कर गिर रहा है और दीवारों पर काली सीलन व दरारें हैं।परिसर और रास्तों पर हरी काई जमी है, जिससे मरीज और तीमारदार लगातार फिसल रहे हैं।
लाचारी और आक्रोश
स्टाफ का कहना है कि न तो यहां डॉक्टरों व एएनएम के ठहरने के लिए सुरक्षित आवास है और न ही बुनियादी सुविधाएं। वरिष्ठ अधिकारियों को बार-बार पत्र लिखने और मीडिया में खबरें आने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब ग्रामीणों ने कलेक्टर और सीएमएचओ से मांग की है कि केंद्र को तत्काल सुरक्षित भवन में शिफ्ट किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
अजय पाल
