डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

करोड़ों खर्च के बावजूद दुनिया बघाड़ गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित, बीमारों को खटिया पर ढोने को मजबूर ग्रामीण

डिंडोरी। आदिवासी बाहुल्य डिंडोरी जिले में विकास के दावों की हकीकत शहपुरा विधानसभा क्षेत्र के दुनिया बघाड़ गांव में साफ नजर आती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते द्वारा गोद लिए गए इस गांव में आज तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं पहुंच सकी है। हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों को आज भी जंगल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के सहारे जीवन बिताना पड़ रहा है।

करोड़ों की स्वीकृति, फिर भी अधूरी सड़क

ग्रामीणों के अनुसार दुनिया बघाड़ गांव के लिए करोड़ों रुपये की लागत से सड़क मार्ग स्वीकृत किया गया था। ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा वर्षों में लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।

इतना ही नहीं, दो वर्ष पूर्व पीएम जनमन योजना के तहत लगभग 6 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया, लेकिन आज तक निर्माण पूरा नहीं हो पाया। अधूरी सड़क अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

सांसद आदर्श गांव, लेकिन सुविधाएं नदारद

दुनिया बघाड़ गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव में सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित होंगी, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय गांव पहुंचते हैं, लेकिन बाद में गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यह क्षेत्र वर्तमान विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे का विधानसभा क्षेत्र भी है, बावजूद इसके ग्रामीण खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

बीमारों को खटिया पर ले जाने की मजबूरी

सड़क नहीं होने का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया या डोली में लादकर करीब 10 किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उपचार के अभाव में कई लोगों की जान तक जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाए हैं।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

लगातार अधूरे पड़े सड़क निर्माण और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण पूरा कराने और गांव को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

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