शहडोल में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर का शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो, जहां नियमों को ताक पर रखकर प्लॉटिंग न की जा रही हो। कलेक्टर की सख्ती के दावे भले किए जा रहे हों, लेकिन जमीनों की खरीद-फरोख्त और अवैध कॉलोनियों के मामलों में प्रशासनिक पैमाना अब भी कमजोर नजर आ रहा है। यही कारण है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग का सिलसिला बेखौफ जारी है।
जानकारी के मुताबिक कल्याणपुर से लेकर पुरानी बस्ती और सत्यम वीडियो के पीछे तक अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। नदी किनारे की जमीनों को भी नहीं छोड़ा गया है। किसानों की भूमि को बिना नियमों का पालन किए छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेचा जा रहा है। बताया जा रहा है कि खसरा नंबर 333 और 335 में भी अवैध प्लॉटिंग की गई है और यहां 8 से 10 प्लॉट बेचे जा चुके हैं।
नियमों के अनुसार कृषि भूमि पर सीधे प्लॉटिंग करना पूरी तरह अवैध है। इसके लिए पहले भूमि का डायवर्सन कर उसे गैर कृषि भूमि में बदलना होता है। साथ ही कॉलोनी विकसित करने के लिए स्थानीय विकास प्राधिकरण से ले-आउट पास कराना, रेरा पंजीयन, आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था और अन्य कई शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
कॉलोनी विकसित करने के लिए सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं देना जरूरी होता है, लेकिन संबंधित प्लॉटिंग में इन व्यवस्थाओं का कोई अता-पता नहीं है। यदि परियोजना 500 वर्गमीटर से अधिक और 8 से ज्यादा प्लॉट की होती है तो रेरा पंजीयन अनिवार्य हो जाता है, लेकिन यहां नियमों को दरकिनार कर जमीनों की खरीद-बिक्री जारी है।
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में पटवारी और आरआई की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं सोहागपुर अनुभाग के तेज-तर्रार एसडीएम तक को इस मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।
मामले में यह भी चर्चा है कि उप पंजीयक कार्यालय में भी नियमों को ताक पर रखकर रजिस्ट्री का खेल जारी है। शहर के बीचों-बीच सत्यम वीडियो के पीछे हो रही प्लॉटिंग पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। इससे पहले भी पटवारियों पर कार्रवाई के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अवैध प्लॉटिंग का नेटवर्क अब भी सक्रिय है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कलेक्टर इस पूरे मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर शहर में अवैध कॉलोनियों का खेल यूं ही चलता रहेगा। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिन जमीनों की अवैध रजिस्ट्रियां हुई हैं, उनकी जांच कर उन्हें शून्य घोषित किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

अजय पाल

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