डिंडौरी मध्यप्रदेश
डिंडोरी।
जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम निर्णय लिए हैं। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ठोस कदम तय किए गए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी, अपर कलेक्टर जे.पी. यादव, एसडीएम शहपुरा ऐश्वर्य वर्मा, एसडीएम डिंडोरी रामबाबू देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने पिछली बैठक के लंबित कार्यों पर नाराजगी जताते हुए सभी अधिकारियों को अगली बैठक से पहले कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
*गोवंश से होने वाली दुर्घटनाओं पर सख्ती*
मुख्य मार्गों पर आवारा गोवंश के कारण बढ़ती दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए कलेक्टर ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाकर सड़कों से गोवंश हटाने और उनके गले में रेडियम पट्टी लगाने के निर्देश दिए। साथ ही जनपद स्तर पर निगरानी दल गठित करने का निर्णय लिया गया।
*“हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं” अभियान लागू*
बैठक में बिना हेलमेट वाहन चालकों के खिलाफ सख्ती बढ़ाते हुए “हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं” अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। पेट्रोल पंप संचालकों को भी स्पष्ट चेतावनी दी गई कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ मामलों में नियमित जांच के निर्देश भी दिए गए।
*ब्लैक स्पॉट पर सुधार के निर्देश*
निवास-तिराहा शहपुरा मार्ग, जैतपुरी जंगल मोड़, जनपद तिराहा और अलोनी तिराहा अमरपुर जैसे दुर्घटना संभावित स्थानों पर रोड मार्किंग, स्पीड ब्रेकर, रंबल स्ट्रिप्स, साइन बोर्ड और झाड़ियों की कटाई जैसे कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। हाईवे से जुड़े सहायक मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया।
*राहवीर योजना और कैशलेस उपचार पर जोर*
‘राहवीर योजना’ के तहत दुर्घटना पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये और उत्कृष्ट कार्य पर 1 लाख रुपये तक के पुरस्कार की जानकारी दी गई। वहीं ‘हिट एंड रन’ मामलों में घायलों को 50 हजार और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया।
साथ ही ‘कैशलेस ट्रीटमेंट योजना’ के तहत दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए।
*परिवहन और ओवरलोडिंग पर निगरानी*
स्लीपर कोच बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए परिवहन और पुलिस विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ओवरलोड वाहनों, विशेषकर खनिज परिवहन में लगे भारी वाहनों पर सख्ती बरतने को कहा गया।
*लापरवाही पर होगी कार्रवाई*
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बैठक में अनुपस्थित रहने या समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करते हुए सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
जिला प्रशासन के इन सख्त फैसलों से साफ है कि अब सड़क सुरक्षा को लेकर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। यदि निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो जिले में दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

