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एमसीबी – मनेंद्रगढ़ विकासखंड के दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुलभ, प्रभावी एवं जनकेंद्रित बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब ऐसे गांव, जो अपने निकटतम उप स्वास्थ्य केंद्र से 5 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर स्थित हैं, वहां प्रत्येक गुरुवार को नियमित रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभिनव योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उनके गांव तक पहुंचाना है, ताकि दूरी, संसाधनों की कमी या परिवहन संबंधी बाधाओं के कारण कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे।
यह पहल विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं ऐसे जरूरतमंद ग्रामीणों के लिए राहतकारी साबित हो रही है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिन्हित गांवों में लगाए जा रहे इन शिविरों में अनुभवी स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सा टीम द्वारा सामान्य एवं मौसमी बीमारियों की जांच, प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है।

गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
इस योजना के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग ने “स्वास्थ्य सेवाएं गांव के द्वार” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप दिया है। अब ग्रामीणों को छोटे-मोटे उपचार या स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, जिससे समय, श्रम एवं आर्थिक संसाधनों की बचत होगी। साथ ही समय पर जांच और उपचार मिलने से गंभीर बीमारियों की रोकथाम में भी सहायता मिलेगी।

उपचार के साथ जागरूकता भी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि इन शिविरों का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। शिविरों में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, स्वच्छता, पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं मौसमी रोगों से बचाव के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है।

जिलेभर में विस्तार की तैयारी
विभाग के अनुसार यह नवाचार फिलहाल मनेंद्रगढ़ विकासखंड में प्रारंभ किया गया है, लेकिन इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए भविष्य में इसे पूरे जिले में विस्तारित करने की योजना है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से मिली सराहना
इस पहल को स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों से व्यापक समर्थन और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। लोगों ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने वाला एक प्रभावी कदम बताते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में “मील का पत्थर” करार दिया है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल दूरस्थ अंचलों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगी, बल्कि ग्रामीण समुदाय में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास, जागरूकता और समयबद्ध उपचार की संस्कृति को भी मजबूत बनाएगी। यह प्रयास जिले में समावेशी एवं जनोन्मुख स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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