बदलाव की नई बयार: पूर्व नक्सली नेता पापा राव ने चुनी लोकतंत्र की राह

दशकों तक हिंसा और संघर्ष के रास्ते पर चलने के बाद, पूर्व नक्सली नेता पापा राव ने अंततः मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अपने साथी देव जी के साथ आत्मसमर्पण करते हुए यह स्पष्ट किया कि बदलते हालातों में अब लोकतांत्रिक तरीके से ही जनता की सेवा करना संभव है। पापा राव ने स्वीकार किया कि जिस क्षेत्र में वे सक्रिय थे, वहां सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और निरंतर खुल रहे नए कैंपों की वजह से संगठन की गतिविधियां काफी हद तक सीमित हो गई थीं। इसी जमीनी हकीकत और परिस्थितियों के भारी दबाव को देखते हुए उन्होंने हथियार त्यागने का निर्णय लिया।

अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए पापा राव ने साफ कर दिया है कि वे चुनावी राजनीति से पूरी तरह दूर रहेंगे, जबकि उनके साथी देव जी ने चुनाव लड़ने की मंशा जताई है। कभी जनता के हितों के लिए सशस्त्र क्रांति का संकल्प लेने वाले इन नेताओं का कहना है कि अब समय बदल चुका है और शांतिपूर्ण तरीके से काम करना ही सही दिशा है। इस महत्वपूर्ण कदम को क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की बहाली के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर विश्वास और विकास का नया मार्ग प्रशस्त होगा।

रिपोर्ट:मयंक श्रीवास्तव 

ब्यूरो चीफ,पुलिसवाला न्यूज़।

कैलाश साहू 

बस्तर ब्यूरो

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