शहडोल मध्य प्रदेश

​शहडोल। मोबाइल फोन के दौर में अब अपराध की परिभाषा बदल चुकी है। जब शब्द हथियार बन जाएं और चैट्स फांसी के फंदे में तब्दील हो जाएं, तो अंजाम रूह कंपा देने वाला होता है। शहडोल जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र में एक युवती की ‘संदिग्ध मौत’ के पीछे छिपे असली गुनहगार को पुलिस ने आखिरकार सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

क्या था मामला?

​बीते 15 जुलाई 2024 को जयसिंहनगर निवासी 22 वर्षीय शिवानी उर्फ अनामिका शुक्ला ने अपने घर के कमरे में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली थी। पहली नजर में यह मामला एक साधारण आत्महत्या का लग रहा था, लेकिन पुलिस की जांच की सुई जब गहराई में उतरी, तो एक भयानक सच सामने आया। पुलिस ने मृतिका का मोबाइल फोन जब्त कर उसे साइबर फॉरेंसिक जोन शहडोल जांच के लिए भेजा, जिसने मौत के असली राज से पर्दा उठा दिया।

नीलमणि उर्फ संजू: ‘मानसिक प्रताड़नाका मास्टरमाइंड

​जांच में खुलासा हुआ कि खड्डा (थाना ब्यौहारी) निवासी 27 वर्षीय नीलमणि उपाध्याय उर्फ संजू मृतिका को लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। साइबर फॉरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपी के काले कारनामों की पोल खोल दी। व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम मैसेज और कॉल लॉग्स की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि आरोपी ने घटना वाले दिन शिवानी को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ा और उकसाया कि उसने मौत को गले लगाना ही बेहतर समझा।
​”यह महज एक आत्महत्या नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से दी गई मानसिक प्रताड़ना का चरम था। आरोपी ने चैट और कॉल के जरिए मृतिका को आत्महत्या के लिए विवश किया।”

बीएनएस की धारा 108 के तहत कार्रवाई

पुलिस ने तमाम डिजिटल साक्ष्यों और परिजनों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ धारा 108 बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज किया। करीब आठ महीने तक चली गहन जांच के बाद, 25 मार्च 2026 को आरोपी नीलमणि उपाध्याय को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।
पुलिस टीम की तत्परता
इस चुनौतीपूर्ण गुत्थी को सुलझाने में जयसिंहनगर थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार बैगा के नेतृत्व में पूरी टीम ने सराहनीय भूमिका निभाई। टीम में सउनि अनिल गौतम, प्रआर बांके सिंह, आरक्षक सुमित गुर्जर, नीरज शुक्ला और महिला आरक्षक खुशबू लोधी शामिल रहे।

निष्कर्ष:

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया और निजी चैट्स का उपयोग किसी की जान लेने का जरिया भी बन सकता है। जयसिंहनगर पुलिस की इस मुस्तैदी ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी चाहे डिजिटल पर्दे के पीछे छिपा हो, कानून के हाथ उसे ढूंढ ही निकालेंगे।

अजय पाल

Comments are closed.

Exit mobile version