समाचार सिवनी / मध्यप्रदेश

ग्रीष्मकाल मृदा परीक्षण के लिए सर्वोत्तम समय

किसान कल्याण वर्ष 2026 अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी में मृदा परीक्षण विषय पर प्रशिक्षण संपन्न

सिवनी: किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी के दर्पण सभागार में मृदा परीक्षण की आवश्यकता, उपयोगिता एवं नमूना लेने की विधि विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से मृदा परीक्षण की जानकारी प्रदान की गई।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. शेखर सिंह बघेल ने बताया कि ग्रीष्मकाल मृदा परीक्षण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। इस अवधि में खेत अपेक्षाकृत सूखे रहते हैं, जिससे मिट्टी की वास्तविक स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण से खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है, जिससे किसान संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर उत्पादन लागत कम कर सकते हैं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रख सकते हैं।

उन्होंने किसानों को मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि भी समझाई। नमूना लेने से पहले खेत की सतह पर मौजूद घास, पत्थर एवं फसल अवशेष हटाना आवश्यक है। इसके बाद अंग्रेजी के ‘V’ आकार का लगभग 6 इंच गहरा गड्ढा बनाकर ऊपर से नीचे तक पतली परत काटकर मिट्टी एकत्र करनी चाहिए। एक खेत से 8 से 10 अलग-अलग स्थानों से मिट्टी लेकर उसे अच्छी तरह मिलाने के बाद लगभग 200 से 250 ग्राम मिट्टी जांच हेतु सुरक्षित रखी जाती है।

कार्यक्रम में कुमार सोनी एवं डॉ. जी.के. राणा ने भी किसानों को मृदा परीक्षण की उपयोगिता, सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी।

वैज्ञानिकों ने किसानों से नियमित रूप से मृदा परीक्षण करवाकर वैज्ञानिक एवं संतुलित खेती अपनाने की अपील की।

रिपोर्ट:- जितेन्द्र बघेल

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