डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
बढ़झर में लाखों की लागत से बन रही टंकी में रिपेयरिंग का आरोप; 50 फीट ऊंचाई पर बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम काम करते दिखे मजदूर, ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच
शहपुरा। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत अमठेरा के ग्राम बढ़झर में जल निगम द्वारा लाखों रुपये की लागत से कराए जा रहे पानी टंकी निर्माण पर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माणाधीन टंकी में कुछ स्थानों पर कथित तौर पर दरारें दिखाई देने और उन्हें सीमेंट-मसाले से भरकर सुधार किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। हालांकि दरारों की प्रकृति और निर्माण की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति विभागीय तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी
दरारों की रिपेयरिंग या खामी छिपाने की कोशिश?
मौके पर टंकी के कुछ हिस्सों में सीमेंट-मसाले से रिपेयरिंग किए जाने की स्थिति दिखाई देने का दावा किया गया है। आरोप है कि निर्माण के दौरान आई दरारों अथवा अन्य कमियों को छिपाने के लिए यह काम किया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि निर्माणाधीन टंकी में दरारें आई हैं तो उनका कारण क्या है और क्या निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है? ग्रामीणों ने विभाग के तकनीकी अधिकारियों से इसकी जांच कराने की मांग की है।
करीब 50 फीट की ऊंचाई पर मजदूर, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
निर्माण की गुणवत्ता के साथ श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार करीब 50 फीट की ऊंचाई पर मजदूर काम कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा किट और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इतनी ऊंचाई पर काम के दौरान सुरक्षा मानकों में लापरवाही किसी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
वीडियो बनाने पर आपत्ति, पारदर्शिता को लेकर भी सवाल
निर्माण कार्य की स्थिति जानने मौके पर पहुंचे पत्रकार द्वारा वीडियो बनाए जाने के दौरान ठेकेदार से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा आपत्ति जताए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक धन से कराए जा रहे निर्माण की जानकारी और गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही है।
सूचना पटल भी नदारद, लागत और एजेंसी की जानकारी कैसे मिले?
निर्माण स्थल पर सूचना पटल नहीं लगाए जाने को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि निर्माण की लागत, योजना, कार्य एजेंसी, ठेकेदार और कार्य अवधि जैसी बुनियादी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को पता चल सके कि गांव में किस योजना के तहत कितनी राशि से और किस एजेंसी द्वारा काम कराया जा रहा है।
तकनीकी निगरानी पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान संबंधित तकनीकी अमले की नियमित मौजूदगी नजर नहीं आती। ऐसे में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, निर्धारित अनुपात और तकनीकी मापदंडों का पालन सुनिश्चित किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभागीय इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन टंकी की तकनीकी जांच करे और यदि किसी स्तर पर अनियमितता अथवा लापरवाही मिलती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
कलेक्टर और प्रभारी मंत्री ने दिया जांच का आश्वासन
मामला सामने आने के बाद डिंडौरी कलेक्टर से चर्चा किए जाने पर संबंधित विभाग से निर्माण कार्य की जांच कराने की बात कही गई है। वहीं जिले की प्रभारी मंत्री की ओर से भी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की जानकारी है।
अब विभागीय जांच से ही स्पष्ट होगा कि टंकी में दिखाई दे रही कथित दरारों और रिपेयरिंग की वास्तविक वजह क्या है तथा निर्माण गुणवत्ता एवं श्रमिक सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

